SAMASTIPUR : जिला के विभूतिपुर प्रखंड अंतर्गत ये इमारत है,हेल्थ एंड वेलनेस सह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गंगौली। इमारत के बाहरी दीवारों में खूबसूरत आकृतियां बनी हुई है पर जब बंद पड़े स्वास्थ्य केंद्र का दरवाजा खुला तो सामने कचरे के सिवा कुछ नही था। कागज पर 7 बेड का अस्पताल अपनी अलग ही व्यथा बयान कर रही है। बेड धूल फांक रहे हैं और खपरैल छत पूरी तरह से उजड़ा चमन हूं दिख रहा है।
स्थानीय निवासी मनोज यादव ने कहा कि "2014 में मुखिया नरेश प्रभाकर के नेतृत्व में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गंगौली का निर्माण हुआ था। जो कि 6-7 सालों में उजड़ कर खत्म होने के कगार पर है।मेरी सरकार से गुजारिश है कि सरकार इसे पुनर्जीवित करने का कार्य करे।
हमारी कोशिश यहां के युवाओं से बातचीत की भी थी और उसी क्रम में चंद्रशेखर ने बताया कि "मैं जब भी यहां से गुजरता हूँ तो मैं देखता हूँ कि ये बंद ही रहता है। मैं एक दिन जब यहां दवाई के लिए आया तो यहां एक डॉक्टर तो थे पर कोई स्टाफ नही थे। आप समझिए कि यहां सारे मेडिकल इंस्टूमेंट खराब हो चुके हैं।
जब कभी भी इमरजेंसी आती है तो यहां से 12 किलोमीटर दूर विभूतिपुर पीएचसी में हमें जाना पड़ता है। ये बेहद ही दु:ख की बात है कि इतना बेहतर अस्पताल होने के बावजूद भी सरकार के उदासीनता और स्टाफ के लापरवाही का खामियाजा यहां के ग्रमीणों को भुगतना पड़ता है"
हमने स्थानीय नेताओं से भी इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश की और स्थानीय नेता अमन पराशर ने बताया कि "हमें अस्पताल को पुनर्जीवित करने के लिए राजनीति से हटकर, इस अस्पताल को जीवित बनाए रखने के लिए साथ खड़ा होना पड़ेगा"
विभूतिपुर विधायक अजय कुमार ने कहा "विभूतिपुर में स्वास्थ्य विभाग की लचर स्थिति है जिस स्थिति के बारे में मैंने विधानसभा में प्रश्न उठाया। सिविल सर्जन और बाकी पदाधिकारीयों के साथ मीटिंग कर दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नही जाएगा।
वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट