बाकी पैसाें का इंतजाम वे नहीं कर पाए लड़की के पिता शादी के बाद पैसे देने की मिन्नतें करते रहे, लेकिन पूरी रकम लिए बगैर लड़का पक्ष शादी काे तैयार नहीं था। इस बीच सोमवार काे कुंदन सतगावां पहुंचा। शालू से बात की और दाेनाें सकरी नदी के पास मैसरवा शिव मंदिर पहुंचे। वहां बिना दान-दहेज के शादी कर ली। कुंदन कोलकाता में ट्रक ड्राइवर है।
मर्जी से शादी की, अब कोशिश करूंगा परिवारों में सुलह हो जाए
शादी के बाद दूल्हा और दुल्हन ने कहा कि दाेनाें बालिग हैं और अपनी मर्जी से विवाह किया है। कुंदन ने कहा कि परिजनाें ने रिश्ता तय किया, उसी दिन मैंने शालू काे पत्नी मान लिया था। पता चला कि पैसाें के विवाद में शादी टाली जा रही है। मामला बिगड़ता दिख रहा था। पैसाें के लिए रिश्ता टूटता ताे अपनी ही नजराें से गिर जाता। ऐसे में पहले शालू की मर्जी जानी। उसे शादी का प्रस्ताव दिया। उसकी सहमति के बाद शादी कर ली। अब काेशिश करेंगे कि दाेनाें परिवाराें में सुलह हो जाए।
बच्चों ने दोनों परिवारों की इज्जत रख ली
लड़की के पिता सत्यनारायण सिंह ने कहा कि हर बाप अपनी बेटी की शादी धूमधाम से करना चाहता है। पैसाें की व्यवस्था करने की बहुत काेशिश की। कर्ज भी लेना चाहा, लेकिन इंतजाम नहीं कर पाया। इसके बावजूद सामर्थ्य के अनुसार दहेज व सामग्री देने काे तैयार था। 60 हजार रुपए दिया, पर बात नहीं बनी। इसी कारण लड़के वाले टालमटोल कर रहे थे। कुंदन और शालू ने दाे परिवाराें की इज्जत रख ली।