2021/01/25

बैन के बावजूद पटना में सिर्फ 6 जगह छापेमारी में 55 किलो प्लास्टिक थैले जब्त, पूरे बिहार का अंदाजा इसी से लगा लीजिए

PATNA : बिहार में पॉलिथीन बेचना और उसका इस्तेमाल करना जुर्म है। इसके बावजूद पटना में सिर्फ 24 घंटे में 6 जगह हुई छापेमारी में 55 किलो प्लास्टिक थैले जब्त किए गए हैं। अगर पूरे बिहार में अभियान चलाया गया तो कितना पॉलिथीन निकलेगा, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। पटना नगर निगम ने शनिवार को छापेमारी अभियान में 85 हजार जुर्माना भी वसूला है। दो साल पहले कैबिनेट से लिए गए फैसले के बाद पॉलिथीन पर बैन लगा दिया गया था। 

जागरुकता अभियान भी चला, जुर्माना भी लगा, लेकिन प्लास्टिक थैले का इस्तेमाल जारी है। कैरी बैग के उत्पादन पर पहली बार पकड़े जाने पर 2000 रुपए फाइन, व्यावसायिक उपयोग पर पहली बार 1500 रुपए फाइन, कैरी बैग के घरेलू उपयोग पर पहली बार 2000 रुपए फाइन, प्लास्टिक को खुले में जलाने पर पहली बार 2000 रुपए फाइन और सार्वजनिक स्थल पर फेंकने पर पहली बार 1000 रुपए फाइन का प्रावधान है, लेकिन जहां प्रशासन की सख्ती ढीली होती है फिर से लोग पॉलिथीन की बिक्री और इस्तेमाल करने लगते हैं।

पटना में यहां धड़ल्ले से पॉलिथीन का इस्तेमाल
बड़े प्रतिष्ठानों को छोड़ दें ते पूरे बाजार में खुलेआम पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है। शहर में कोई इलाका ऐसा नहीं, जहां पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। पॉलिथिन दुकानों में बिक भी रहा है। पटना के अंटा घाट, मीठापुर, कदमकुआं, कंकड़बाग, पोस्टल पार्क की सब्जी मंडियों में खुलेआम पॉलिथीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। सचिवालय के पास की सब्जी मंडी से लेकर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पास वाली दीघा सब्जी मंडी तक में नियम का कोई पालन नहीं हो रहा। 


शनिवार को छापेमारी अभियान के दौरान पटना के नूतन राजधानी अंचल में 2.1 किलो प्रतिबंधिक प्लास्टिक जब्त किए गए एवं 4800 रुपये जुर्माना वसूला गया। पाटलिपुत्र अंचल में 3 किलो प्लास्टिक की जब्ती एवं 5 हजार रुपए जुर्माना की वसूली की गई। कंकड़बाग अंचल में प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई और 8100 रुपए जुर्माना वसूला गया। 


उक्त अंचल में कुल 7 किलो प्लास्टिक के थैले जब्त किए गए। बांकीपुर अंचल में सबसे ज्यादा 11 किलो प्लास्टिक जब्त की गई एवं 5800 रुपए जुर्माना की राशि वसूली गई। पटना सिटी में 5 एवं अजीमाबाद अंचल से 1 किलो प्लास्टिक थैले जब्त किए गए। दोनों में कार्रवाई के दौरान कुल 2200 रुपये वसूले गए।

पॉलिथीन से जहरीली हो रही पटना की हवा

  • पॉलिथीन से नुकसान को लोग नजरअंदाज कर रहे हैं। इसको जलाने से प्रदूषण फैल रहा है। कई बार लोग दुकान के बाहर पॉलिथीन जला देते हैं, इससे राजधानी की हवा जहरीली हो रही है।
  • जमीन की उर्वरा शक्ति इससे प्रभावित हो रही है। कचरे के साथ या नालियों के जरिए यह फैलती रहती है।
  • शहर के कई नाले पॉलिथीन की वजह से जाम हो जा रहे हैं। जब इसका उपयोग सरकार-प्रशासन के दबाव पर कम हुआ था तो नालों में भी कम दिखते थे, लेकिन अब ये फिर से दिखने लगे हैं।
  • कचड़े का प्रबंधन निगम की ओर से हुआ है। कई इलाकों में गाड़ीवाला कचरा ले जा रहा है, लेकिन इन कचरों में बड़ी मात्रा में पॉलिथीन भी आ रहे हैं।
  • जानवरों को भी परेशानी है। वे कचरा के साथ पॉलिथीन भी खा जा रहे हैं।

कैरी बैग के उत्पादन पर फाइन

  • पहली बार- 2000
  • दूसरी बार- 3000 रुपए
  • बार-बार-5000 रुपए

व्यावसायिक उपयोग पर फाइन

  • पहली बार-1500 रुपए
  • दूसरी बार- 2500 रुपए
  • बार-बार-3500 रुपए

कैरी बैग के घरेलू उपयोग पर फाइन

  • पहली बार-2000 रुपए
  • दूसरी बार-3000 रुपए
  • बार-बार- 5000 रुपए

प्लास्टिक को खुले में जलाने पर फाइन

  • पहली बार- 2000 रुपए
  • दूसरी बार- 3000 रुपए
  • बार-बार- 3500 रुपए

सार्वजनिक स्थल पर फेंकने पर फाइन

  • पहली बार- 1000 रुपए
  • दूसरी बार- 1500 रुपए
  • बार-बार- 2000 रुपए

कोविड की वजह से मॉनिटरिंग सिस्टम ढीला पड़ा
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन AK घोष ने बताया कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड रेगुलेटरी बॉडी है। हम अपने पावर के अनुसार लोकल बॉडी को डायरेक्टिव भेजते हैं। कहीं से सूचना आती है कि यहां पर पॉलिथीन फेंका जा रहा है तो हम डायरेक्ट एक्शन भी लेते हैं। सभी DM को और सभी शहरी निकाय को निर्देश भेजे गए हैं। एक मीटिंग भी बुलाई जा रही है। शुरू में बैन काफी सफल रहा। कोविड की वजह से मॉनिटरिंग सिस्टम ढीला पड़ गया था।

 अब वैक्सीन भी आ गई है। फिर से पॉलिथीन के खिलाफ अभियान चलाएंगे। कानून का पालन कराने के अलावा लोगों को अवेयर करना भी जरूरी है। वे बताते हैं कि पॉलिथीन का इस्तेमाल रोकने के लिए छापेमारी टीम है। जिला प्रशासन इसे संचालित करता है। हमलोगों ने कपड़े के थैले का वितरण कोविड के पहले किया था। फिर से सब्जी बाजार में बांटेंगे। हमलोगों ने बड़ी कंपनियों से भी आग्रह किया है कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसब्लिटिज से कपड़े का थैला बंटवाइए। लोगों पर फिर से दबाव बढ़ाया जाएगा।