2021/01/25

बिहार की बेटी ने पुलिस को किया शर्मसार:अपने अगवा कृषि अधिकारी पिता की वापसी नहीं होने पर लिखा- पुलिस पैसे से मुंह बंद कर लेती है, FIR बेकार है यहां

PATNA : पुलिस का इकबाल बिहार में किस हाल में है, इसके लिए किसी आम आदमी की प्रतिक्रिया की अब दरकार नहीं। 18 जनवरी को पटना शहर के कंकड़बाग से पटना जिले के ही मसौढ़ी में ड्यूटी पर गए बिहार सरकार के कृषि अधिकारी अजय कुमार की रविवार सुबह सड़ी-गली लाश मिली।

 पुलिस सकुशल रिहाई का फर्जी दावा ही करती रही, दूसरी तरफ प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) की बेटी अपने पिता के अपहरण से जुड़े साक्ष्य दिखाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, पिछले चुनाव में स्वघोषित CM प्रत्याशी पुष्पम प्रिया, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के साथ-साथ IPS अधिकारियों और केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पुलिस के रवैए पर "Shame on Bihar Police" का मैसेज भेजती रही। 

वह पुलिस-प्रशासन को जगाने के लिए लिखती रही कि जहां सरकारी अधिकारी की रक्षा संभव नहीं, वहां आम आदमी का क्या होगा! लेकिन, किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ा और अब रविवार को अजय कुमार की लाश के बारे में भी आम लोगों ने ही पुलिस को जानकारी दी।

अजय कुमार की बेटी स्नेहलता ने किस तरह तंग आकर क्या लिखा, आप भी पढ़िए-

नमस्ते,

मेरे पिता अजय कुमार 4 दिनों से लापता हैं। वह मसौढ़ी ब्लॉक में प्रखंड विकास अधिकारी के पद पर तैनात हैं। हमेशा की तरह वह ट्रेन से 18 जनवरी को सुबह 7:30 बजे पटना से अपने कार्यालय के लिए निकले थे, लेकिन वहां नहीं पहुंचे। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, उनके फोन का केवल अंतिम लोकेशन 'सरमा' गांव (मसौढ़ी से 1 किलोमीटर की दूरी पर) में मिला था।

एक आदमी का नाम 'गोलू' है। वह संजय कुमार नाम के किसी डीलर का बेटा है। उसे कुछ वाउचर जमा करना था, जिसे वह लंबे समय से जमा नहीं कर रहा था। मेरे पिता को भी किसी को जवाब देना होता है, इसलिए उन्होंने उसे वाउचर जमा करने का दबाव बनाया था। मेरे पिता 18 जनवरी को 1 महीने के बाद अपने कार्यालय में जा रहे थे। वह ट्रेन से मसौढ़ी के रास्ते में थे तो गोलू ने उन्हें फोन किया, सिर्फ यह पूछने के लिए वह कहां हैं या कब तक पहुंच रहे हैं। मेरे पिता के कॉल रिकॉर्ड के अनुसार अंतिम कॉल गोलू का ही था। फिर कुछ समय के बाद उनका फोन 3 घंटे के लिए बंद हो गया। फिर 1 दिन तक स्विच ऑन रहा (चूंकि वह शाम तक नहीं लौटे तो हमने उनके नंबर पर कॉल करने का प्रयास किया था, इसलिए यह पता है) फिर अगले दिन फोन बंद हो गया।

स्नेहलता ने कहा, SSP तक से निराशा हाथ लगी।

हमें गोलू पर पूरा शक है। हमारे पास कुछ सबूत हैं, लेकिन पुलिस उसपर कोई और जांच नहीं कर रही है। हम कई बार पुलिस अधिकारियों, DSP और SP के पास गए, लेकिन कोई भी उसपर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। वे हमारी बात नहीं सुन रहे हैं। मुझे लगता है कि इन दिनों FIR या पुलिस अधिकारियों का कोई उपयोग नहीं है। बस, कुछ पैसे के लिए उनका मुंह बंद है। कुछ बेशर्म लोग हैं, जो परिवार के बारे में नहीं सोचते हैं। यह किसी के साथ भी हो सकता है। 4 दिन हो गए हैं और न ही पुलिस ने मेरे पिता के मोबाइल फोन को खंगालने की कोशिश की है, न ही कोई सुराग ढूंढ सकी है।हमें न्याय चाहिए! बिहार पुलिस पर शर्म करो!

स्नेहलता ने आम आदमी का भी दर्द बयां किया।

(यह स्नेहलता के लिखे का शब्दानुवाद है, जिसमें उसने पिता के लिए पुलिस के रवैए पर तीखी टिप्पणी की है)

Input-dainik bhasker