2021/01/25

कचरे से कागज चुन जुड़वां भाई बनाते हैं कॉपियां, एक साल में 5000 गरीब और जरूरतमंद नौनिहालों को बांट चुके हैं

MUZAFFARPUR : कचरे से कागज चुन जुड़वां भाई नोटबुक बनाते हैं फिर उसे गरीब बच्चों के बीच बांटते हैं। पिछले एक साल में दोनों भाई तकरीबन 5000 गरीब व जरूरतमंद बच्चों के बीच ऐसे नोटबुक बांट चुके हैं। इस पर ये नौनिहाल अपनी किस्मत की लकीर खींच रहे हैं।

शहर के रमना रोड निवासी एवं दिल्ली यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क के पीजी फाइनल ईयर के छात्र आयुष पोद्दार एवं पीयूष पोद्दार को इस तरह के सोशल वर्क के लिए मद्रास स्कूल ऑफ सोशल वर्क की तरफ से आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिता में देश में दूसरा पुरस्कार मिला है।

शुरुआत में तो दोनों भाईयों ने इस काम को अपनी पढ़ाई के साथ सोशल वर्क के रूप में शुरू किया। लेकिन अब यह इनका मिशन बन गया है। कार्यों से प्रेरित होकर उनके साथ 11 अन्य दोस्तों की भी टोली इस अभियान में जुड़ गई है।

ताकि अधिक से अधिक बच्चों की मदद की जा सके। इनकी मानें तो इंस्ट्राग्राम पर गतिविधियों की जानकारी दी जा रही है। जल्द ही पोर्टल बनाकर अभियान से लोगों को जोड़ सहयोग लिया जाएगा। घरों से सादा रद्दी कागज मांग और अधिक नोटबुक तैयार कर गरीब बच्चों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

ऐसे आया आइडिया : आयुष और पीयूष दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान पिछले साल एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। फोटो स्टेट की दुकान पर उन्होंने देखा कि काफी मात्रा में सादा पेज खराब हो जाते हैं। इसे फेंक या रद्दी में बेच दिया जाता है। दोनों के मन में ख्याल आया कि यदि इसे एकत्र कर नोटबुक बनाया जाए तो गरीब बच्चों के लिखने के काम आ सकता है। कागज की बचत होने से पर्यावरण की रक्षा भी होगी। लॉकडाउन से पहले दोनों ने दिल्ली में ही 200 गरीब परिवारों को नोटबुक दिए।

लॉकडाउन में की पहल, बना रहे पेड़ बचेंगे हम पढ़ेंगे नोटबुक

आयुष ने कहा कि लॉकडाउन में घर आए तो इसे मिशन के रूप में इस काम को शुरू कर दिया। घर घर से सादा कागज मांग पेड़ बचेंगे हम पढ़ेंगे लोगो वाला नोटबुक बना गरीब बच्चों को दे रहे हैं। शुरुआत में तो कोई नोटिस नहीं लेता था। लेकिन अब लोग आगे आकर मदद कर रहे हैं।