2020/12/08

समस्तीपुर में जब्त वाहनों से थाना परिसर फुल, सड़क बनी मालखाना

SAMASTIPUR :  नगर व मुफस्सिल थाना में जब्त वाहनों से पूरा परिसर अस्त व्यस्त हो चुका है। जब्त शराब व अन्य सामान किसी तरह मालखाना की जगह महिला हाजत तक में रख दिया जाता है। जबकि जब्त वाहनों से थाना परिसर पूरी तरह फूल हो गया है। मालखाना की लचर व्यवस्था के कारण थाना परिसर ही कबाड़खाना बनता जा रहा है। 

आलम यह है कि जब्त किए गए चौपहिया वाहन, ट्रक व अन्य बड़े वाहनों को रखने के लिए अब थाना परिसर में जगह नहीं बची है। वाहन जब्त किए जाने के बाद उन्हें नगर थाना के बाहर सड़क पर खड़ा कर छोड़ दिया जाता है। जहां धूप, गर्मी और बरसात में पड़े-पड़े वाहन सड़ जाते हैं। 

संसाधन के अभाव में जब्त करोड़ों रुपये मूल्य कीमत की कौड़ियों के भाव में भी नहीं रह जाती। खुले आसमान में वाहन मोटरसाइकिल, कार, ट्रक आदि जंग खाकर बर्बाद हो रहे हैं। कई वाहन अब चलने लायक भी नहीं है। नगर थानाध्यक्ष अरुण राय ने बताया कि शराबबंदी के बाद काफी संख्या में बड़े वाहन जब्त किए गए हैं। जब्त वाहनों को बेहतर तरीके से रखने का प्रयास किया जाता है। 

सामान की सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे मालखाने में जब्त सामानों की सुरक्षा व गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हर थाना में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा सुरक्षा के लिए संतरी भी तैनात हैं। नगर थानाध्यक्ष अरुण राय ने बताया कि मालखाना में रखे सामान अदालती प्रक्रिया में है। न्यायालय से आदेश मिलने पर जब्त सामन को थाना से विमुक्त किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से शराब का विनष्टीकरण और जब्त वाहन को अदालत के आदेश पर छोड़ा जा रहा है। समानों की सुरक्षा के लिए संतरी तैनात है। इसके अलावे सीसीटीवी कैमरे से भी निगरानी की जाती है।

 क्या होता है मालखाना पुलिस थानों का एक छोटा सा कमरा, जिसे मालखाना कहा जाता है। जहां कहीं से पकड़ा गया नशीला पदार्थ, हथियार व वारदात के दौरान इस्तेमाल हुआ सामान सुबूत के तौर पर रखे जाते हैं। इसके अलावा जब्त बाइक, ट्रक या बड़े वाहन व्यवहारिक रूप से थाना परिसर या सड़क किनारे रखे जाते हैं। हालांकि लिखा-पढ़ी में वह मालखाने के भीतर ही होता है। यह मालखाना हर पुलिस स्टेशन मे तैनात एक हेड मुर्हिरर होता हैं, जो मालखाने का इंचार्ज होता है। अगर मालखाने के अंदर कोई सामान गायब या नष्ट होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी होती है। साथ ही उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाती है। 

अधिकारियों का कहना है कि हेड मुर्हिरर का तबादला होने पर जल्दी कोई पुलिसकर्मी उसका चार्ज नहीं लेना चाहता, क्योंकि इसमें बहुत जोखिम होता है। रजिस्टर के अनुसार सामान का मिलान कराने में ही कई माह लग सकते हैं, लिहाजा एक दूसरे के विश्वास में ही पुलिस कर्मी मालखाने का चार्ज लेते और देते हैं। इसके कारण कई पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है।