2020/12/12

समस्तीपुर में निजी क्लीनिक और सदर अस्पताल में भी बंद रही ओपीडी सेवा,बिना इलाज कराएं ही लौटे मरीज

SAMASTIPUR :  सरकार द्वारा चिकित्सा शिक्षा में किए जा रहे बदलाव के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर शुक्रवार को जिले के चिकित्सक हड़ताल पर रहे। निजी अस्पताल और क्लीनिक के साथ-साथ सदर अस्पताल में भी ओपीडी सेवा बाधित रही। सिर्फ आपातकालीन सेवाएं ही सुचारू रूप से चली। आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थान से डिग्री प्राप्त करने वाले चिकित्सकों द्वारा जेनरल सर्जरी, आर्थोपेडिक सर्जरी या नाक, कान व गला की सर्जरी का विरोध किया गया। आईएमए ने मेडिकल काउंसिल की इस नीति का कड़ा विरोध किया।

 साथ ही आयुष संस्थान से डिग्री हासिल करने वालों द्वारा तमाम तरह की सर्जरी करने के लिए योग्य करार देने को गलत बताया। मौसम में परिवर्तन को लेकर सदर अस्पताल के ओपीडी में सुबह से मरीज पहुंचने लगे थे। लेकिन, हड़ताल की वजह से चिकित्सकों ने कार्य नहीं किया। सिर्फ फिजियोथेरेपी विभाग में चिकित्सक उपस्थित रहे। ओपीडी में चिकित्सक के अलावा सभी कर्मी उपस्थित रहे। चिकित्सकों द्वारा मरीज का इलाज नहीं करने की वजह से कर्मियों ने भी राहत की सांस ली।

बिना इलाज कराएं ही लौटे मरीज : सदर अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकों ने मरीजों का इलाज नहीं किया। इस वजह से मरीजों को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा। जिसके चलते मरीजों एवं उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सदर अस्पताल के अलावा शहर के अन्य निजी अस्पतालों में भी ऐसी ही स्थिति बनी रही। ज्ञात हो कि सदर अस्पताल की ओपीडी सेवा प्रतिदिन दो शिफ्टों में संचालित होती है। इस वजह से ओपीडी सेवा में इलाज कराने के लिए पहुंचे मरीजों का पंजीयन काउंटर पर पूर्जा भी नहीं काटा गया। मरीज मेडिसिन, सर्जरी, डेंटल, टीबी, ईएनटी, महिला विभाग एवं हड्डी विभाग के पास खड़े थे। डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से उन्हें बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा। गरीब मरीज इधर-उधर भटकते नजर आए।

मिक्सोपैथी पद्धति पर जताया विरोध : आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आरएन सिंह ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा एक गुणवत्तापूर्वक शिक्षा होती है, जिसमें चिकित्सक को अच्छे हुनर दिए जाते हैं। मॉर्डन मेडिसिन पूरी तरह से रिसर्च पर आधारित विद्या है। इसमें हर मर्ज का इलाज आधुनिक तरीके से किया जाता है। चिकित्सा विद्या हर महामारी के नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाती है। देश में कोई नई दवाई आनी हो या नयी तकनीक विकसित करनी हो या फिर बीमारी को रोकने के लिए कोई वैक्सीन तैयारी करनी हो, मॉर्डन मेडिसिन के रिसर्च से ही संभव हो पाता है। लेकिन अब सभी पैथी के छात्रों को एमबीबीएस की डिग्री देने का प्रावधान है और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को दो साल की पढ़ाई के बाद सर्जरी की अनुमति देने का भी प्रावधान है। आईएमए इस बदलाव का विरोध कर रहा है।