PATNA : बिहार के किसानों को नए साल पर नीतीश सरकार ने बड़ा झटका दे दिया है. राज्य सरकार ने किसानों को कृषि उपकरणों की खरीद पर मिलने वाली सब्सिडी के दायरे से 63 चीजों को बाहर कर दिया है.
पहले बिहार में सरकार 81 कृषि उपकरणों पर सब्सिडी देती थी. बिहार सरकार के ताजा फैसले में पराली जलाने को लेकर फैलने वाले प्रदूषण की चिंता साफ नजर आती है. राज्य सरकार ने जिन 17 उपकरणों पर सब्सिडी देने का फैसला किया है उसमें ज्यादातर वेस्ट मैनेजमेंट यानी खेती के कचड़े के बेहतर निबटारे में उपयोगी हैं. केंद्र सरकार इन 17 उपकरणों के अलावा 16 दूसरे तरह के कृषि उपकरणों पर अलग-अलग स्कीम के तहत किसानों को सब्सिडी दे रही है.
बिहार सरकार ने जिन उपकरणों पर सब्सिडी हटाई है उसमें कंबाइन हार्वेस्टर, पावर टिलर्स, पावर थ्रेसर्स शामिल हैं. जिन उपकरणों पर सब्सिडी जारी रखी गई है उसमें ब्रश कटर, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, सेल्फ प्रोपेल्ड रिपर, स्ट्रॉ रिपर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मिनी राइस मिल, मिनी ऑयल मिल.
कृषि विभाग के एक सीनियर अफसर ने बताया- इस साल कृषि उपकरण सब्सिडी का फोकस वेस्ट मैनेजमेंट है जिससे पराली जलाने की चुनौती से निपटा जा सके और राज्य में इस वजह से प्रदूषण कम हो. अधिकारी ने कृषि उपकरण सब्सिडी का बजट कम करने पर कहा कि कोरोना की वजह से राज्य की माली हालत खराब है और उपलब्ध वित्तीय संसाधन में जो बेहतर किया जा सकता था, वो सरकार ने किया है.
पराली जलाने वाले किसानों की सब्सिडी रोक लेती है बिहार सरकार
पंजाब, हरियाणा की तरह बिहार में भी पराली जलाने की समस्या हाल के वर्षों में बढ़ी है जिससे परेशान सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं. बिहार देश का इकलौता राज्य है जहां पराली जलाने पर सब्सिडी रोक ली जाती है. राज्य सरकार ने पराली जलाने को सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ दिया है.
पिछले तीन महीने में बिहार के 11 जिलों के 900 किसानों पर पराली जलाने की वजह से कार्रवाई की गई है. सरकार ने डीबीटी के जरिए इनके खाते में ट्रांसफर होने वाली सरकारी योजनाओं की राशि और सब्सिडी का भुगतान रोक दिया है.
Input-hindustan