अपने पिता को कंधा देने वाली 16 वर्षीय सुनीता कुमारी, 14 वर्षीय सिकांता कुमारी, 11 वर्षीय रेश्मी कुमारी व 6 वर्षीय सुषमा कुमारी लगातार राे रही थीं।
वहीं उनकी मां जासो देवी रह-रहकर बेहोश हो जा रही थी। फतुहा घाट पर बड़ी पुत्री सुनीता ने पिता को मुखाग्नि दी।
मिथिलेश घर में कमाने वाला एकमात्र व्यक्ति था। वह बटाईदार किसान था। उसके जाने से उसकी चारोें पुत्रियों की परवरिश पर कौन करेगा, इसकी चिंता उसकी पत्नी को सताने लगी है। मुखिया संगीता देवी ने अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक मदद की।