सूत्रों ने न्यूज एजेंसी भाषा को बताया कि रक्षा मंत्री के बयान के बाद विपक्ष के नेता अपनी बात रखेंगे और राजनाथ सिंह आवश्यकता पड़ने पर सभापति की अनुमति से स्पष्टीकरण दे सकते हैं।
इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, 'रक्षा मंत्री वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) गतिरोध पर दोपहर 12 बजे बयान देंगे। उसके बाद विपक्ष के नेता मुद्दे पर बोलेंगे। जरूरत हुई तो उसके बाद मंत्री स्पष्टीकरण दे सकते हैं।'
इससे पहले राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा था कि लद्दाख में हम चुनौती का सामना कर रहे हैं लेकिन हमारे सशस्त्र बल देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए डटकर खड़े हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस सदन को प्रस्ताव पारित करना चाहिए कि यह सदन और सारा देश सशस्त्र बलों के साथ है जो देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए डटकर खडे़ हैं।
उल्लेखनीय है कि गलवान घाटी में 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प में भारत के 20 सैन्य कर्मियों के शहीद होने के बाद पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ गया।
पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात भारतीय भूभाग पर कब्जा करने की चीन की नाकाम कोशिश के बाद स्थिति और बिगड़ गई।
भारत ने पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर कई पर्वत चोटियों पर तैनाती की और किसी भी चीनी गतिविधि को नाकाम करने के लिए क्षेत्र में फिंगर 2 तथा फिंगर 3 इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।
चीन फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच के इलाकों पर कब्जा कर रहा है। इस इलाके में फैले पर्वतों को फिंगर कहा जाता है। चीन ने भारत के कदम का पुरजोर विरोध किया है। हालांकि, भारत यह कहता रहा है कि ये चोटियां एलएसी के इस ओर हैं। भारत ने चीनी अतिक्रमण के प्रयासों के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक एवं हथियार भी भेजे हैं। साथ ही, क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है।