सूत्रों ने बताया कि जेनहुआ डेटा लीक मामले में सरकार ने इन रिपोर्टों का अध्ययन करने, उनका मूल्यांकन करने, कानून के किसी भी उल्लंघन का आकलन करने के लिए नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर के तहत एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। कमेटी से 30 दिनों में रिपोर्ट मांगी गई है।
सूत्रों ने आगे बताया कि सरकार ने उस रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसमें बताया गया कि विदेशी सोर्स सहमति के बिना देश के नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच रही है या फिर प्राप्त करने की मांग कर रही है।
विदेश मंत्रालय ने चीन द्वारा भारत की प्रमुख हस्तियों की जासूसी करने को लेकर चीनी राजपूत के सामने मुद्दा उठाया। चीन ने इसके जवाब में कहा कि जेनहुआ एक निजी कंपनी है और अपनी स्थिति को सार्वजनिक रूप से बता चुकी है।
उल्लेखनीय है कि इंडियन एक्सप्रेस अखबार की रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन की डेटा कंपनी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विपक्ष के प्रमुख नेताओं, कैबिनेट मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मुख्य न्यायाधीश तथा कई अन्य हस्तियों की जासूसी की है। अखबार में यह भी कहा था कि कि इस कंपनी का संबंध चीन की सरकार से है।
इसके बाद कांग्रेस ने पूरा मुद्दा संसद में भी उठाया था। कांग्रेस सांसदों ने सदन में कहा था चीन की डिजिटल आक्रमकता से निपटने के लिए सरकार को मजबूत व्यवस्था बनानी चाहिए।
कांग्रेस के दो सदस्यों के सी वेणुगोपाल और राजीव सातव ने राज्यसभा में शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाया था। इस पर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि वह इस पर ध्यान दें और संबंधित मंत्री को इसकी जानकारी दें।