पीरबहोर के थानाध्यक्ष रिजवान अहमद ने बताया कि शव बेड पर पड़ा था। पास में एक इंजेक्शन व मृतका का मोबाइल भी मिला पड़ा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
थानेदार के मुताबिक, स्वजनों ने बताया कि मंगलवार की रात से वह घर वालों का फोन रिसीव नहीं कर रही थी। शिवांगी के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य रामकृष्णा नगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर स्थित एक अपार्टमेंट में रहते हैं।
वहां से सुबह शिवांगी के इंजीनियर भाई और अन्य स्वजन हॉस्टल पहुंचे। पीएमसीएच के प्राचार्य और डॉक्टर की अन्य दोस्त भी उसके कमरे में गए। कमरा खुला तो उसका शव बिस्तर पर पड़ा था। शरीर पर जख्म के निशान नहीं थे। वह हॉस्टल के चौथे फ्लोर के एक कमरे में अकेले रहती थीं।
मृतका के भाई ने बताया कि मां और पिता की सेहत सही नहीं है। इसी वजह से उन्हें सिर्फ यही बताया कि है कि शिवांगी की तबीयत सही नहीं है।पुलिस की मानें तो स्वजन किसी पर आरोप नहीं लगाए हैं। पुलिस हॉस्टल में रहने वाली अन्य डॉक्टर और उनके साथियों से भी पूछताछ करेगी।
घटना के बाद हॉस्टल के बाहर अन्य सीनियर रेसिडेंट डॉक्टर जुटे थे। शिवांगी ने 2017 में पीएमसीएच में एनेस्थीसिया में पीजी में नामांकन लिया था। पिछले महीने एनएमसीएच में बतौर सीनियर रेजीडेंट ज्वाइन किया था।
बैचमेट डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि वह भी एनएमसीएच में साथ ही सीनियर रेजिडेंट ज्वाइन किए हैं। शनिवार को भी एनएमसीएच में मुलाकात हुई थी। हमेशा की तरह वह नॉर्मल थी। बताया कि इसी बीच शिवांगी का जीएमओ (जनरल मेडिकल ऑफिसर) का रिजल्ट भी निकल गया था। इसमें भी उसका नाम आ गया था।