नर्सें एम्स के गेट के बाहर जमा हो गईं और नारेबाजी की। नर्सों के हड़ताल का असर अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज पर पड़ा है। नर्सों की मांग है कि उनकी सेवा नियमित की जाए, वेतन वृद्धि हो और सेवा शर्तों में बदलाव हो। एम्स प्रशासन और नर्सों के संघ के बीच बातचीत चल रही है।
इन लोगों की मांग है कि समान कार्य के बदले समान वेतन दिया जाए। साथ ही एम्स में नियमित स्टाफ को मिलनेवाली सभी सुविधाएं भी दी जाएं। इस बीच अगर कोई नर्सिंग स्टाफ या नर्स यहां से छोड़ जाती है तो उसके कार्य का एम्स के पैड पर अनुभव सर्फिकेट दिया जाए।
एक नर्स ने बताया कि हम लोगों की ड्यूटी कोरोना मरीजों के वार्ड में लगी है। हम लोग कोरोना के मरीजों की देखभाल कर रहे हैं, लेकिन कोई जॉब सिक्योरिटी नहीं है। सरकार ने कोरोना के मरीजों के इलाज में लगे स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन बढ़ाया है, लेकिन हमलोगों को इसका लाभ नहीं मिला है।
अगर हमलोगों की नौकरी चली जाती है तो हमारे पास यह दिखाने के लिए कोई डॉक्यूमेंट नहीं है कि हमने एम्स में काम किया है। मेरे साथ काम करने वाली नर्सें कोरोना की शिकार हुईं हैं उनके लिए भी सुविधा नहीं है। हमारे परिवार के लिए भी कोई सुरक्षा नहीं है।