पेशे से ऑटो चालक शंकर घर में पत्नी और बच्चे के साथ रहते थे। संयोग से उनकी पत्नी बरखा कुछ काम से घर से बाहर निकली थीं। शंकर बिस्तर पर लेटकर अपने बेटे को खेला रहे थे। बेटा उनकी पेट पर खेल रहा था, अचानक घर के अंदर की मिट्टी धंसी और 10 इंच मोटी दीवार तेज आवाज के साथ बाप-बेटे के ऊपर धरासायी हो गई। आवाज सुनकर पत्नी दौड़कर कमरे में गई, तो दृश्य देखकर सिहर गई।
दहाड़ मारकर रोने-चिल्लाने लगी, उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़कर आए और दोनों को मलबे से निकालकर पास के नारायणी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। इधर, शंकर की पत्नी बरखा को विश्वास नहीं हो रहा था कि पलभर में उसकी दुनिया उजड़ गई है।
पड़ोसी नारायणी अस्पताल से दोनों को रिम्स ले गए। वहां भी डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि कर दी, उसके बाद दोनों का वहीं पोस्टमार्टम हुआ। शंकर मूल रूप से हजारीबाग के रहने वाले थे। पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शवों को लेकर परिजन हजारीबाग चले गए।
नगड़ी सीओ ने दी 10 हजार रु. की आर्थिक मदद
घटना की सूचना मिलने के बाद नगड़ी सीओ और मेयर आशा लकड़ा मृतक शंकर के घर पहुंचे। नगड़ी सीओ ने प्रशासन की ओर से दी जाने वाली सहायता राशि 10 हजार रुपए उपलब्ध कराई। साथ ही, यह भी कहा कि उपायुक्त के निर्देश पर चार-चार लाख रुपए की मुआवजा राशि के लिए तुरंत कागजात पूरा कराया जाएगा।
मेयर आशा लकड़ा ने भी आसपास लोगों से कहा कि वे इस बारिश में सतर्क रहें, क्योंकि पूरे इलाके में बड़ी संख्या में कच्चे मकान हैं। यहां नगर निगम की ओर किसी तरह की तरह कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। यहां रहनेवाले अधिकतर लोग निम्न आय वर्ग के हैं।
खटाल मुहल्ले में 500 से ज्यादा कच्चे मकान
सेक्टर पांच स्थित खटाल मुहल्ले में जहां दुर्घटना हुई, वहां 500 से अधिक कच्चे मकान हैं। रांची में इससे पहले भी कई बार भारी बारिश हुई है, लेकिन खटाल मुहल्ले में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई थी। यह पहली घटना हुई, जिसमें पिता-पुत्र दोनों की जान चली गई। मेयर ने यहां के लोगों से कहा कि सतर्क रहें, क्योंकि कोई घर पिलर पर नहीं है।