बताया जाता है कि अपने 20 वर्षों के राजनीतिक यात्रा में उन्होंने समाज के बीच विशाल पहचान चिन्ह छोड़ गया। जिनके प्रभाव से अपने भाबज को मुखिया बनाया। जिसकी चर्चा उनके जाने के बाद बड़ी जोर-शोर से चल रहा है। लोगों का कहना है कि वे अपने जीवन यापन के लिए कपड़े का दुकान चला कर,सिलाई तथा खेती कर परिवार का भरण- पोषण करते हुए समाज सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रहे थे।
जिसके फस्वरूप वे तीन बार वार्ड सदस्य पद को सुशोभित किया। वर्तमान में वे निर्विरोध उप मुखिया भी चुने गए। इनके कार्यशैली से प्रभावित होकर इनकी भावज रतन देवी प्रसाद की पत्नी सुलेखा देवी को विभूतिपुर ग्राम पंचायत की मुखिया पद को सुशोभित करने का भी अवसर प्राप्त है।
वे अपने पीछे दो भाई रतन देव प्रसाद एवं सत्य प्रकाश,पत्नी नायडू कुमारी, जो आंगनवाड़ी सहायिका पद पर कार्यरत हैं। तीन पुत्र अनमोल कुमार,अनिल कुमार एवं चंदन कुमार को छोड़कर स्वर्गवास हो गए हैं।
सबसे दु:खद तो यह है कि जिस माता-पिता ने अपने पुत्रों को लालन-पालन कर और इनकी इतनी बड़ी कृति को देख फूले नहीं समाते थे।वैसे पिता राम बहादूर महतो,माँ कैली देवी को छोड़ चले गए।
वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट