बता दें कि पीडि़त ने बैंक खाता से राशि निकासी मामले में उपभोक्ता फोरम में भारतीय स्टेट बैंक मुख्य शाखा के शाखा प्रबंधक और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पटना के क्षेत्रीय निदेशक के खिलाफ मामला दायर किया था।
पेंशन बचत खाता है। जिसमें से अवैध तरीके से 21 अक्टूबर 2017 को साइबर अपराधी ने पांच बार इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के माध्यम से 49 हजार 497 रुपया ट्रांसफर कर लिया था। ग्राहक के मोबाइल पर ओटीपी भेज कर निकासी की गई थी। पीओएस के माध्यम से ट्रांसफर होने की स्थिति में ट्रांसफर की गई राशि खाता धारक को दो दिनों के बाद प्राप्त हरेती है।
इस बीच भुगतान को बैक द्वारा रोका जा सकता है। इस मामले में साइबर अपराधी द्वारा फ्रॉड किए जाने की लिखित एवं मौखिक शिकायत घटना के एक घंटे के अंदर बैंक को दी थी। शिकायतकर्ता के खाते से किस-किस बैंक एवं खाते में राशि भेजी गई उसका नाम व पता बैंकिंग प्रणाली में दर्ज हो चुका था।
इस स्थिति में इंस्टेंट सेट होल्ड लग जाता है। बैंक ने फ्रॉड डिटेक्शन का कार्य नहीं किया। जिससे अपराधी राशि को निकाल कर अपना उपयोग कर लिया। बैंक को दो दिनों के अंदर कार्रवाई करनी थी। बावजूद इसके सेवा में त्रुटि की गई।