MUZAFFARPUR : सदर अस्पताल परिसर के इमरजेंसी में इलाज को पहुंची महिला की मौत के बाद शव को घर ले जाने के लिए स्वजन इधर-उधर भटकते रहे।
कंट्रोल रूम और उपाधीक्षक कार्यालय से संपर्क किया, लेकिन शव वाहन नहीं मिल सका।
थक-हार कर स्वजन गोद में शव को उठाकर इमरजेंसी से बाहर आए और ई-रिक्शा से उसे घर ले गए। इस घटना से पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया।
स्वजनों ने आरोप लगाया कि सरकार तमाम सुविधाएं दे रही है, लेकिन सही से प्रबंधन नहीं होने से मरीज परेशान होते हैैं। यहां क्या-क्या सुविधा है उसकी सूची व अधिकारी का मोबाइल नंबर रहना चाहिए। 24 घंटे हेल्प यू सेंटर काम करना चाहिए, ताकि मरीज वहां पर संपर्क कर सकें। यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
सदपुरा की राजो देवी को स्वजन सदर अस्पताल लेकर आए थे। इमरजेंसी में तैनात डॉ.एमएम कमाल ने मरीज को देखने के बाद मृत घोषित कर दिया।
स्वजनों ने बताया कि पीडि़ता पहले से गंभीर रूप से बीमार थीं। यहां इलाज के लिए लाए थे। स्वजन कमल साह ने आरोप लगाया कि कर्मियों से शव वाहन की मांग की, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
आरजू मिन्नत करता रहा, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। शव को गोद में उठाकर बाहर आए और ई-रिक्शा से उसे घर ले जा रहे हैैं। अस्पताल के रजिस्टर पर महिला का नाम राजो देवी, पति स्व. सीताराम साह, सतपुरा तथा उम्र 60 साल दर्ज है। शाम में 3:30 बजे उसे लाने की बात अस्पताल प्रबंधन ने बताई है।
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ.हरेंद्र आलोक ने बताया कि उनको अभी जानकारी नहीं मिली है। सदर अस्पताल प्रबंधक से पूरी रिपोर्ट मांगी जाएगी। शव के लिए वाहन नहीं देना दुखद है। इस मामले में जिसकी लापरवाही होगी।
उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। वहीं, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने बताया कि तीन दिन से शव वाहन गैरेज में है। उसकी मरम्मत हो रही है।
शव को भेजने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की जा रही थी। इस बीच स्वजन ई-रिक्शा से शव लेकर चले गए। वह अपने स्तर से भी इसकी छानबीन कर रहे हंै। वरीय अधिकारी को रिपोर्ट दी जाएगी।