वर्षों से चल रहा प्रदेश के अस्पतालों में मुफ्त दवा वितरण
विदित हो कि राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के अस्पतालों में मुफ्त दवा वितरण का कार्यक्रम वर्षों से चल रहा है। निश्शुल्क दी जा रही दवाओं का वितरण सही प्रकार से हो रहा है या नहीं और भंडार में दवाओं की उपलब्धता क्या है, इसकी मॉनिटरिंग ई-औषधि, ड्रग एंड वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम (डीवीडीएमएस) से होती है। जिसकी नियमित समीक्षा होती है। समीक्षा के लिए अलग-अलग छह सूचकांक निर्धारित किए गए हैं।
बिहार के इन जिलों का प्रदर्शन रहा बेहद निराशाजनक
इस महीने की तीन तारीख और इसके बाद 12 तारीख को मुफ्त दवा वितरण कार्यक्रम की समीक्षा में यह बात सामने आई कि निर्धारित छह सूचकांक में भोजपुर, अररिया, पश्चिम चंपारण, नवादा और जमुई जैसे जिलों का प्रदर्शन निराशाजनक है। इसके बाद मुख्यालय स्तर से इसमें सुधार लाने के निर्देश दिए गए। बावजूद व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं दिखा। जिसे सरकार के आदेश की अवहेलना मानते हुए अफसरों पर कार्रवाई की गई है।
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार के मुताबिक दवा वितरण कार्यक्रम के मूल्यांकन, मॉनिटरिंग में टाल-मटोल की नीति अपनाई जा रही है जो सरकार के आदेश को चुनौती देने जैसा है। जिसके बाद कार्यपालक निदेशक ने 21 जिलों के दोषी पदाधिकारियों, कर्मचारियों के वेतन पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है।