SAMASTIPUR:हत्या के एक मामले में दो हत्यारों को साढ़े 14 साल बाद स्थानीय व्यवहार न्यायालय में पंचम सत्र न्यायाधीश दशरथ मिश्रा की अदालत ने बुधवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
न्यायाधीश ने दोनों आरोपित को हत्या एवं साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया है। बता दें कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के धुरलख निवासी देव नारायण महतो और विक्रमपुर बांदे गांव निवासी उमाशंकर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
सजा के साथ 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की भी इन दोनों पर लगाया गया है। फैस्ले में यह भी कहा गया है कि अर्थदंड की राशि नहीं देने पर छह-छह महीने अतिरिक्त कारावास की सजा इन्हें भुगतनी पड़ेगी।
मिली जानकारी के मुताबिक अभियोजन पक्ष की ओर से सूचक गुणेश्वर महतो ने अपने पुत्र विनय कुमार सिंह की मौत को लेकर मुफस्सिल थाना में वर्ष 2006 में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इसको लेकर तत्कालीन थानाध्यक्ष ने कांड संख्या 82/2006 दर्ज किया था। मृतक के पिता ने आरोप लगाया था कि 22 फरवरी 2006 की संध्या दोनों आरोपित देव नारायण व उमाशंकर उनके पुत्र को घर से बुलाकर ले गए और गोली मारकर हत्या कर दी और शव कों रिक्शा पर लादकर उनके घर के दरवाजे पर लाकर रख दिया था। इस क्रम में उमाशंकर उनके पुत्र की मोटरसाइकिल लेकर आया था। वहीं मृतक के स्वजनों ने उसे पकड़ लिया था। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई थी।
घटना की सूचना पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची थी और मृतक के स्वजनों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया था। इसके बाद मृतक के पिता के बयान पर मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले को लेकर इलाके में काफी सनसनी का आलम रहा था। काफभ् दिनों तक इसकी चर्चा का बाजार गर्म रहाा था। अब इस संबंध में कोर्ट का फैसला आने से एक बार फिर मामला चर्चा में आ गया है। मृतक के स्वजनों, दोनों आरोपित और उनके स्वजनों में इस फैसले को लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई थी। सभी इस फैसले को अपने नजरिये से देख रहे हैं।