2020/11/26

समस्तीपुर में 7.46 लाख बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित

BIHAR-SAMASTIPUR- बच्चों में दिव्यांगता होने के कारणों में पोलियो की भूमिका प्रमुख होती है। इसे ध्यान में रखते हुए जिले में आगामी 29 नवंबर से तीन दिसंबर तक पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान दूसरे चरण का आगाज होगा। 

इस अभियान के तहत सात लाख 46 हजार बच्चों को पोलियो खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे पूर्व प्रथम चरण में 11 से 15 अक्टूबर तक पोलियो अभियान चलाया गया था।

 जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. सतीश कुमार सिन्हा ने बताया कि पोलियो एक गंभीर बीमारी है, जो किसी व्यक्ति के शरीर को लकवाग्रस्त कर देता है। 

छोटे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है, इसलिए इस बीमारी से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा होता है। इसे होने के पहले ही खत्म कर देने के लिए एक से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।

 डॉ. सिन्हा ने जिले के सभी लोगों से अपने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए उन्हें पोलियो की दवा पिलाकर अभियान को सफल बनाने में सहयोग करने की अपील की।

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान के तहत 29 नवंबर से पांच दिनों तक चलने वाले चक्र में जिले के आठ लाख 37 हजार 85 घरों में सात लाख 46 हजार 27 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाना सबसे पहला लक्ष्य है। 

अभियान की सफलता के लिए जिले में 2510 दल को लगाया जाएगा। जिसमें घर-घर दल में 2064, ट्रांजिट दल में 249, मोबाइल दल में 114, वन मैन दल में 84 को लगाया गया है। दल को निगरानी करने हेतु 776 सुपरवाइजर व 141 सब डिपो को भी नियुक्त किया गया है। खतरनाक बीमारी है पोलियो

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि पोलियो एक खतरनाक लकवाग्रस्त वायरस जनित रोग है। बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उसे पोलियो का खतरा अधिक होता है।

 यह बीमारी विशेष रूप से रीढ़ के हिस्सों व मस्तिष्क को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इससे बचाव के लिए लोगों को अपने बच्चों को पोलियो की दवा जरूर पिलानी चाहिए। पोलियो ड्रॉप बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाए रखता है। कोविड संक्रमण से बचाव का रखा जाएगा ध्यान

यूनिसेफ के एसएमसी राजीव कुमार ने बताया कि पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाव का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कर्मियों द्वारा दवा पिलाने के समय फिजिकल डिस्टेंसिग का पालन किया जाएगा। 

संक्रमण को ध्यान में रखते हुए बच्चों को ड्रॉप पिलाने के बाद हाथ में मार्कर से किसी तरह का निशान नहीं लगाया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मियों को पूरी तरह से मास्क व ग्लव्स का उपयोग करने के लिए निर्देशित किया गया है।