यह पहला मौका है जब लालू प्रसाद यादव बिहार चुनाव में प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। चारा घोटाले के एक और मामले में ज़मानत मिल गई है लेकिन दुमका कोषागार के एक मामले में फ़िलहाल उन्हें जमानत नहीं मिली हैं इसलिए उन्हें रिहा होने के लिए अभी इंतज़ार करना होगा। इस मामले में सजा का पचास प्रतिशत अगले महीने यानी 9 नवम्बर को पूरा होगा। इसलिए, तब तक लालू यादव को जेल में ही रहना होगा।
बिहार चुनाव में नेताओं ने अब एक-दूसरे पर हमले और तेज कर दिए हैं। बुधवार को ही सुल्तानगंज की सभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव का नाम लिए बगैर उनकी जमकर निंदा की। नीतीश ने कहा कि कुछ लोग बस मेरी आलोचना करते रहते हैं,।
लेकिन जब पति-पत्नी (पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, राबड़ी यादव) को मौका मिला था तो कुछ नहीं किया। नीतीश ने कहा कि उनकी सरकार में समाज के पिछड़ों और उन तबकों के लिए काम हुआ जिनकी इज्जत नहीं होती थी। तेजस्वी यादव ने नीतीश का जवाब राघोपुर से नामाकंन के बाद दिया। उन्होंने कहा कि हम सरकार बनाने जा रहे हैं। नीतीश कुमार जी के प्रति नौजवानों में आक्रोश है।