शुक्रवार शाम घोषित यूपी-पीसीएस के रिजल्ट में मेरठ की मेधा ने एक बार फिर खुद को साबित किया है। शहर से पांच मेधावी पीसीएस बने हैं। इसमें से तीन छात्राएं और दो छात्र हैं। मेरठ में चयनित छात्र-छात्राओं की संख्या 10 तक हो सकती है।
छात्र-छात्राओं की इस सफलता से परिजन खुशी से झूम उठे। चयनित मेधावियों की यह आखिरी मंजिल नहीं है। सभी यूपीएससी के लिए तैयारियों में जुटे हैं। चयनित उक्त मेधावियों में से दो इंजीनियर हैं और प्रतिष्ठित कंपनियों से नौकरी छोड़ यूपीपीएससी में पहुंचे हैं। चयनित मेधावियों ने समाज और जरुरतमदों की मदद के लिए काम करने का संकल्प दोहराया है।
इंटर के बाद शादी को कहा, मैंने पढ़ने को घर छोड़ दिया-मेरठ शस्त्रीनगर स्थित सिद्धार्थ नगर निवासी संजू रानी वर्मा वाणिज्य कर अधिकारी बनी हैं। संजू की सफलता की कहानी बेहद संघर्ष भरी है। जन्म ऐसे परिवार में हुआ जहां बेटियों की शिक्षा पसंद नहीं की जाती थी। संजू के अनुसार इसी सोच में उनकी सबसे बड़ी बहन की इंटर पास करते ही शादी कर दी गई।
जॉब करते हुए की तैयारी-संजू के अनुसार शुरुआती चार महीने में उनके मित्र अनुराग ने पूरा खर्च उठाया। इसके बाद शहर के विभिन्न स्कूलों में जॉब की। संजू के अनुसार जॉब में मेरा सिर्फ इतना ही टारगेट था कि कमरे का किराया निकल जाए और किताबें खरीद सकूं। 2005-2006 में संजू ने सीसीएसयू में एमए में प्रवेश लिया, लेकिन पूरा नहीं कर सकी।
डीयू में एमए दर्शनशास्त्र के पेपर भी दिए, लेकिन एकाएक मेरठ बुला लिया गया। इसके रिजल्ट का संजू को नहीं मालूम कि क्या हुआ। एक निजी स्कूल में संजू को परेशान किया गया तो उन्होंने जॉब छोड़ दी और ट्यूशन पढ़ाने लगी। संजू के मुताबिक मेरा मन यूपीएससी का था। आज भी मेरा लक्ष्य कलेक्टर बनने का है। संजू के अनुसार सिविल एकेडमी के निदेशक अभिषेक शर्मा ने उन्हें इसके लिए प्रेरित किया। हर स्तर पर मदद की।
मां को समर्पित की सफलता-संजू के मुताबिक उनकी मां भगवती देवी का 2013 में निधन हो गया। वे कहा करती थी कि बस तू जल्दी कामयाब हो जा। शुक्रवार का रिजल्ट उनके लिए समर्पित है। संजू के सिर पर दो बहनों की जिम्मेदारी है। एक बहन विडो हैं जबकि दूसरी बोल नहीं पाती।
गरीब और लड़कियों के लिए काम करेंगी-संजू के अनुसार वह गरीब और लड़कियों के लिए काम करेंगी। गार्डनिंग का शौक रखने वाली संजू ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कितने प्रयासों के बाद सफल हुए। फर्क इससे पड़ता है कि आप सफल हुए या नहीं।