सलोनी बताती है कि जब वह पिता व चाचा के साथ जसपुर में एक दंगल प्रतियोगिता देखने गई तो वहां उनके वजन वर्ग से ज्यादा एक पहलवान लड़के ने उन्हें चुनौती दी. एक दो बार मना करने के बाद पिता ने सलोनी को अखाड़े में उतर कर युवक को पटखनी देने को कहा. अखाड़े में जैसे ही सलोनी उस युवक के सामने उतरी तो भारी भीड़ जमा हो गई. जिस पर आयोजकों को पुलिस बुलानी पड़ी. वही सलोनी ने उस पहलवान को कुश्ती में चित्त कर जमकर वाही वाही बटोरी.
18 साल की सलोनी अब तक तीन बार नेशनल जूनियर चैम्पियनशिप में पदक जीत चुकी हैं. आसपास के क्षेत्र में होने वाले दंगलों में वह बढ़ चढ़कर भाग लेती हैं. आज पूरे क्षेत्र में वह दंगल गर्ल के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं. सलोनी का सपना है कि वह भी फोगाट बहनों की तरह देश के लिए पदक जीतें और देश का व पिता का नाम रोशन करें.
अभाव, संघर्ष और तानों के बीच भी सलोनी अपने गांव, शहर और राज्य और देश का नाम रोशन कर रही हैं. पिता सतीश मजदूरी करते हैं. वह भी चाहते हैं कि उनकी बेटी एक दिन देश का नाम रोशन करे. इसके लिए वह उसके लिए कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ते हैं. वह कहते हैं कि यदि सरकार मदद करे तो यह प्रतिभाएं बहुत कुछ कर सकती है.
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