दरभंगा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को मंजूरी दी। इसके साथ ही बिहार में पटना के बाद दूसरा एम्स बनने का रास्ता साफ हो गया है।
दरभंगा एम्स, 750 बेड का होगा। 1264 करोड़ रुपए की लागत से यह एम्स करीब 48 महीने में बनकर तैयार होगा। दरभंगा एम्स में एमबीबीएस की 100 सीटें, बीएससी नर्सिंग की 60 सीटें निर्धारित की गई हैं। इसमें 15 से 20 सुपर स्पेसिलिटी डिपार्टमेंट भी होगा।
इसका निर्माण प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2015-16 के बजट भाषण में दरभंगा एम्स की घोषणा की थी। एम्स बनने से प्रत्यक्ष रूप से करीब 3000 लोगों को रोजगार मिलने की भी उम्मीद है।
केंद्रीय कैबिनेट ने दरभंगा एम्स के लिए डायरेक्टर के एक पद के सृजन को भी मंजूरी दी है। डायरेक्ट के लिए मूल वेतन 225000 रुपए निर्धारित किए गए हैं। अलाउंसेज आदि मिलाकर 237500 रुपए से अधिक नहीं, तय किया है।
दरभंगा में एम्स के निर्माण पर खर्च होने वाली 1264 करोड़ रुपए की मंजूरी वित्त मंत्रालय ने पहले ही दे दी थी। 25 अगस्त को केंद्रीय वित्त सचिव की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय के प्राइमरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर वित्त मंत्रालय ने मुहर लगाते हुए अनुमानित राशि की स्वीकृति दे दी।
प्राइमरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार दरभंगा एम्स 750 बेड का होगा और इसके निर्माण कार्य पर 1264 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है।
दरभंगा एम्स बनने से न केवल उत्तर बिहार के बल्कि नेपाल तक के लोगों को फायदा होगा। खासकर के बेतिया से लेकर कोसी और सीमांचल के सहरसा, सुपौल और पूर्णियां तक के लोगों स्वास्थ्य क्षेत्र में इसका फायदा होगा। उत्तर बिहार के लोगों को पटना पर निर्भरता कम होगी।