मंगलवार को भारत, Nepal प्रशासन की सहमति पर पिथौरागढ़ निवासी कमलेश चंद की बारात Nepal के दार्चूला के लिए रवाना हुई। बारात में केवल दूल्हा और उसके पिता सहित दो ही लोग विवाह में शामिल हुए। प्रशासन की शर्त पर महज 15 मिनट झूलापुल खोला गया। दूल्हा और उसके पिता दार्चूला स्थित दूल्हन के घर पहुंचे।
विवाह में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान को छोड़कर महज वरमाला डालकर ही दूल्हा, दुल्हन को लेकर वापस भारत की ओर लौट आया। झूलापुल पर पहुंचने पर सीमा पर तैनात जवानों ने भी बधाई दी। इस दौरान दोनों नव दंपतियों ने विवाह के लिए अनुमति मिलने पर भारत-नेपाल प्रशासन का आभार जताया।
Coronavirus ने लोगों की जिंदगी ही नहीं धार्मिक कार्यो में होने वाले रीति रिवाजों में गहरा प्रभाव डाला है। मंगलवार को Nepal के दार्चूला में हुई शादी इसका उदाहरण है। न तो दूल्हा-दूल्हन के बीच विवाह के फेरे हुए, न ही एक पिता अपनी बेटी का कन्यादान कर पाए। बस एक वरमाला से ही चंद मिनटों में शादी की रस्म पूरी हो गई।
पिथौरागढ़ के कमलेश चंद और नेपाल दार्चूला के राधिका ने कभी सपने में भी यह नहीं सोचा होगा कि उन्हें इस तरह एक-दूजे का हाथ थामना होगा। कमलेश ने बताया कि पूर्व में उनका विवाह बीते 22 मार्च को होना था। दोनों परिवार शादी को यादगार बनाने की तैयारी में जुटे हुए थे। लेकिन कोरोना संकट ने उनकी यह हसरत पूरी नहीं होने दी। Lockdownlockdown के कारण विवाह टाल दिया गया।
Input-Hindustan