भारतीय स्टेट बैंक के विभूतिपुर शाखा में लगभग एक लाख की संख्या में इस बैंक के ग्राहक हैं।कोरोना के इस महामारी काल में सरकार ने बैंको में प्रवेश करने से पहले ग्राहकों को हैण्ड सिनेटाईजर से सिनेटाइज के बाद ही प्रवेश कराने को कहा है।लेकिन इस बैंक में न सिनेटाईजर की व्यवस्था है और न ही थर्मल स्क्रीनिंग की।सैकड़ों की संख्या में ग्राहक यहाँ बैंक के बाहर लाईन में खड़े किए जाते हैं।छाया की व्यवस्था बस नाम मात्र की है ।सभी ग्राहक चिलचिलाती धूप में खड़े होने से मजबूर होकर छाया में जाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करते हैं।जब ग्राहकों द्वारा सुरक्षा गार्ड से बैंक में प्रवेश करने का आग्रह किया जाता है तो समझाने के बजाय अभद्र व्यवहार के साथ पेश आते हैं।वहीं बैंककर्मी भी ग्राहकों का काम कम आराम ज्यादा फरमाते हैं।कभी लिंक फैल तो कभी लंच टाईम की बात करते हैं।जबकि बैंकिंग में लंच टाईम ही नहीं होता है।
रही बात इतनी बड़ी संख्या की ग्राहकों वाली S.B.I की इस शाखा में ग्राहक को समुचित व्यवस्था नहीं मिल पा रही है।करोड़ों की मुनाफे में चलने वाली इस शाखा में सेल्फ पासबुक प्रिंट मशीन,पीओएस मशीन,चेकबुक मशीन तो दूर बैंककर्मी व ग्राहकों के लिए एसी या कूलर,पीने का पानी तक की व्यवस्था नहीं है।भारतीय स्टेट बैंक की इस शाखा का बात करें तो इसका क्षेत्रफल महज 1000-1200 वर्गफीट(लगभग)है।इतनी बड़ी ग्राहकों वाली इस शाखा में कई नामचीन प्रबंधक अपना योगदान दे चुके हैं किन्तु किन्हीं प्रबंधक द्वारा शाखा के स्थानांतरण व ग्राहकों को मिलने वाली सुविधा की कोशिश नहीं की गयी।इस क्षेत्र के पुलिस प्रशासन द्वारा भी ग्राहकों को सोशल डिस्टेंसिंग रखने का अपील की कोई कोशिश नहीं की जाती है ।देखने वाली बात अब यह है कि स्थानीय प्रशासन,शाखा प्रबंधक व क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा ग्राहकों को कब तक मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराती है।
एडिट-अवनीश कुमार(छात्रनेता)
ग्राहक एसबीआई विभूतिपुर