SAMASTIPUR : जिले के उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत किसान के 400 से अधिक किसान संगठनों की तरफ से नये कृषि कानून को वापस लेने,आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन को रद्द करने और बिजली बिल माफ करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय किसान महासभा का दुसरा प्रखंडस्तरीय सम्मेलन चैता संगमा विद्यालय के प्रांगण में किया गया।
जिसमें सम्मेलन को संबोधित करते हुए विभूतिपुर विधानसभा के पूर्व विधायक कॉ.रामदेव वर्मा ने कहा कि किसान अपने मांगों को लेकर पिछले 79 दिन से दिल्ली के बॉर्डर पर लाखों की संख्या में प्रदर्शन कर रहे हैं।
इन किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए भाजपा सरकार द्वारा लाठीचार्ज,आशु गैस,वाटर कैनन से हमला किया गया और अब सड़कों पर सीमेंटेड बैरिकेड खड़ा कर गहरी खाई तक खोद दी गयी। मानो किसानों के खिलाफ अपने देश की सरकार युद्ध कर रही हो।केन्द्र की मोदी सरकार ने कृषि अध्यादेशों को लोकसभा व राज्यसभा में कानून में बदल दिया है।
मोदी सरकार के द्वारा कृषि कानून आजादी के बाद देश की खेती व गरीबों की खाद्य सुरक्षा पर सबसे भीषण हमला है।नए कानून कंपनियों को फसल खरीद की सीधी छूट देता है। कम्पनियां में धन्ना सेठ अपने धनबल के दम पर उपज खरीद कर तिजोरी में बंद कर अपना एकाधिकार जमा लेंगे।
ये कानून पूरे देश में ठेका खेती लाने के लिए कंपनियों को छूट देता है।राज्य सरकारें भी इस पर रोक नहीं लगा सकती। इससे अघोषित रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य का खात्मा हो जाएगा और किसान के मंडियों पर बड़ी कंपनियों का कब्जा हो जाएगा। और बड़ी कंपनियों को अधिकतम मुनाफा कमाने की गारंटी होगी।किसान और मजदूर कंपनियों के गुलाम हो कर रह जाएंगे।
भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य फूलबाबू सिंह ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री झूठ बोल रहे हैं। नये कृषि कानून से छोटे किसानों को कोई फायदा नहीं होने वाला है।उल्टे, आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन कर कोटा से ज्यादा स्टॉक रखने पर पाबंदी हटा देने के कारण आलू,प्याज और खाद्य तेल की कीमत आसमान छू रही है।
देश के लगभग 80 प्रतिशत सीमांत किसान जो अपने खेत पर मजदूरी भी करते हैं।और खेतिहर मजदूरों का बड़ा हिस्सा बटाईदारी प्रथा के तहत खेती करता है।इस कानून से बुरी तरह से प्रभावित होगा और ये कानून गरीबों को कुपोषण और भुखमरी की ओर ढकेल देगा।
भाकपा-माले के प्रखंड सचिव महावीर पोद्दार ने कहा कि नये कृषि कानून लागू होने के बाद देश में 82 करोड़ लोगों को मिल रहा खाद्य सुरक्षा का लाभ छीन लिया जाएगा।
सम्मेलन को किसान महासभा के नेता फुलेन्द्र प्रसाद सिंह ने किसान संगठनों द्वारा जारी आंदोलन में नये कृषि कानून को वापस लेने,फसलों का सही दाम देने,कृषि लॉन माफ करने और भूमिहीन किसानों और मजदूरों को जमीन देने,बिजली बिल माफ करने,मनरेगा में प्रतिदिन काम और मजदूरी 500 रुपये डेली देने व सभी गरीबों को राशन देने की मांग का प्रस्ताव रखते हुए किसान आंदोलन को सक्रिय समर्थन देने का निर्णय लिया।
वहीं सम्मेलन की अध्यक्षता चन्द्रेश्वर प्रसाद सिंह और शंकर प्रसाद यादव ने किया। साथ ही इस किसान महासभा के सम्मेलन को गंगा प्रसाद पासवान,रामभरोस राय,रामबाबू कुमार,अवधेश दास,दिनेश दास आदि ने संबोधित किया।अन्त में, सम्मेलन में 19 सदस्यों की कमिटी का गठन किया गया।
जिसमें सचिव- दिलीप राय, अध्यक्ष- चन्द्रेश्वर प्रसाद सिंह, उपाध्यक्ष- शंकर प्रसाद यादव,श्याम नारायण चौरसिया, संयुक्त सचिव- फूलेन्द्र प्रसाद सिंह, रामबहादुर सहनी, कोषाध्यक्ष- रामप्रीत सहनी, हरिकांत गिरि,हरे कृष्ण राय, विनोद राय,शिवनारायण चौरसिया,अशोक यादव,राजेश्वर राय,बादल राय,मो० उस्मान,रामसुदीन सिंह, सचिदानंद सिंह,शिवदानी दास, विमल कुमार,रामाशीष सिंह सदस्य चुने गए।
वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट