2021/01/18

SAMASTIPUR : शीतलहर और कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त ,ठंड अभी बरकरार रहेगी

SAMASTIPUR : शीतलहर और कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा छा जा रहा है। दिनभर सूरज और बादलों के बीच लुकाछिपी का खेल चलता रहा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मौसम विज्ञानी डॉ. ए सत्तार के अनुसार उत्तर बिहार में अब धीरे-धीरे मौसम साफ होगा। धूप खिलने से लोगों को राहत मिलेगी, लेकिन ठंड अभी बरकरार रहेगी। 

मौसम विज्ञानी ने बताया कि इस दौरान कहीं-कहीं सुबह एवं शाम में हल्के से मध्यम कुहासा भी छाया रहेगा। रविवार को अधिकतम तापमान 16.1 एवं न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। अधिकतम तापमान सामान्य से 5 डिग्री कम रिकॉर्ड हुआ। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य है। एक-दो दिन में पुरवा हवा चलने की भी संभावना है।

मौसम के बदले मिजाज से फसलों पर भी असर पड़ना प्रारंभ हो गया है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वरीय विज्ञानी डॉ. डीके राय का बताना है कि गेहूं के लिए मौसम अनुकूल है। जरूरत है समय से सिचाई के साथ-साथ नाइट्रोजन का छिड़काव करने की। साथ ही साथ समय से खरपतवार नियंत्रण के लिए दवा उपयोग की। वैज्ञानिक का बताना है कि ठंड का मौसम गेहूं के लिए बेहतर हैु लेकिन धूप ज्यादा दिन तक नहीं निकलने से पौधे को नुकसान होता है। अब जबकि धूप निकलना प्रारंभ हो गयाु गेहूं के लिए बेहतर मौसम माना जाएगा।

धूप निकलते ही मकई के पौधे में आ जएगी जान

विश्वविद्यालय मक्का विभाग के वरीय विज्ञानी डॉ. मृत्युंजय कुमार का कहना है कि ऐसे मौसम में ज्यादा दिनों तक प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित रहती है। इससे मक्के की पत्ती पीली एवं नीली होने लगती है, लेकिन किसान इससे हतोत्साहित ना हों। मौसम खुलते ही पौधे हरे होने लगेंगे। सूर्य प्रकाश नहीं मिलने के कारण मिट्टी में पाए जाने वाले पोषक तत्व पौधे नहीं ले पाते हैं। इससे पत्तियों के रंग में बदलाव हो जाता है। किसान अपने खेतों में सिचाई करें इससे मक्के की फसल बेहतर होगी। उन्हेंने ऐसे मौसम में सभी फसलों में नमी बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।