2021/01/14

समस्तीपुर में गृह प्रसव दर में आई कमी, 83.7 प्रतिशत हुआ संस्थागत प्रसव

SAMASTIPUR : समस्तीपुर जिले में गृह प्रसव को दरकिनार कर महिलाओं ने सुरक्षित व संस्थागत प्रसव की तरफ अपना कदम बढ़ाया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे - 5 के अनुसार जिले में संस्थागत प्रसव में बदलाव देखने को मिला है। बीते पांच साल में संस्थागत प्रसव के फायदों के प्रति आई जागरूकता के कारण इसमें 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पूर्व में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 की रिपोर्ट में संस्थागत प्रसव दर 73.3 प्रतिशत था। 

जो इस बार के सर्वे में बढ़कर 83.3 प्रतिशत हो गया है। वहीं एनएफएचएस-4 में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संस्थागत प्रसव दर 62.7 प्रतिशत रहा था। यह दर बीते पांच सालों में बढ़ कर 71.9 प्रतिशत हो गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा अनुमंडलीय व सदर अस्पताल में सुरक्षित प्रसव संबंधी विभिन्न सुविधाएं प्रदान की गयी हैं।

प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख में कराया जाता है संस्थागत प्रसव

स्वास्थ्य विभाग द्वारा संस्थागत प्रसव को अधिकाधिक बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक असर दिख रहा है। गर्भवती महिलाओं के प्रसव प्रबंधन की दिशा में आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लाई गई जागरूकता और स्वास्थ्य केंद्रों पर आधारभूत संरचना में बदलाव से संस्थागत प्रसव की तस्वीर बदल रही है। 

सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने बताया सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव जरूरी है। संस्थागत प्रसव अस्पताल में प्रशिक्षित और सक्षम स्वास्थ्य कर्मी की देख-रेख में कराया जाता है। अस्पतालों में मातृ एवं शिशु सुरक्षा के लिए भी सारी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। साथ ही किसी भी आपात स्थिति यथा रक्त की अल्पता या एस्पेक्सिया जैसी समस्याओं से निपटने को तमाम सुविधाएं अस्पतालों में उपलब्ध होती हैं।

गृह प्रसव दर में भी आयी कमी

आमजनों में संस्थागत प्रसव के प्रति आई जागरूकता के कारण घरों में होने वाले प्रसव दर भी घटे हैं। राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार यह आंकड़ा 5.1 फीसदी था। एनएफएचएस-5 के मुताबिक वर्तमान में यह दर 2.9 प्रतिशत है। यानि घरों में प्रसव दर 2.2 फीसदी कमी आई है। घरों में प्रसव के कई मायनों में जोखिम होता है। प्रसव के समय किसी भी आपात स्थिति से निपटने की सुविधाओं की कमी के कारण प्रसूता की जान भी चली जाती है। प्रसव के समय मां व शिशु की सुरक्षा कई मायनों में महत्वपूर्ण है।