AURANGABAD : औरंगाबाद में BPSC PT के बहिष्कार और परीक्षा केंद्र परिसर में हंगामा करने के मामले में 10 नामजद और 50 अज्ञात परीक्षार्थियों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। मुफस्सिल थाना में परीक्षा केंद्र अधीक्षक ने मामला दर्ज कराया है। यह हंगामा औरंगाबाद के बीएल इंडो पब्लिक स्कूल परीक्षा केंद्र से जुड़ा है। परीक्षार्थियों ने प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप लगाया था। 27 दिसंबर को परीक्षा आयोजित हुई थी। वहीं, आयोग ने 850 परीक्षार्थियों की परीक्षा फिर से लेने का फैसला भी किया है। इसके लिए आयोग परीक्षा केंद्र औरंगाबाद के बजाय पटना में बनाएगा। जनवरी अंत तक इसकी तिथि की घोषणा हो सकती है।
क्या है आरोप
हंगामे की सूचना पर औरंगाबाद DM सौरभ जोरवाल पहुंच गए थे। उन्होंने मामले की छानबीन की थी। अभ्यर्थियों से भी बातचीत की थी। अभ्यर्थियों का आरोप था कि प्रश्नपत्र का सील टूटा हुआ दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रश्नपत्र लीक किया गया है। ऐसे में वे परीक्षार्थी परीक्षा नहीं देंगे। परीक्षार्थी BBEd इंडो पब्लिक स्कूल सेंटर की परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़ गए थे। DM का कहना था कि छात्रों ने जो कुछ भी लिखित शिकायत दी है, उस पर जांच कर कार्रवाई करेंगे।
डीएम से की थी शिकायत
परीक्षार्थियों द्वारा डीएम सौरभ जोरवाल से दो बिंदुओं पर शिकायत की गई थी। पहला परीक्षा 12 की बजाए 12:30 अपराह्न में प्रारम्भ हुई और दूसरा प्रश्न पत्र की सील टूटी हुई है जिसे विद्यार्थियों के सामने नहीं खोला गया। परीक्षार्थियों ने इसी आधार पर इस केंद्र की परीक्षा रद्द कर फिर से परीक्षा लिए जाने का आग्रह किया था। बाद में DM ने अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में त्रिस्तरीय जांच कमेटी गठित की थी। जांच में परीक्षा 12:30 से प्रारम्भ होने की बात गलत पाई गई क्योंकि मजिस्ट्रेट के अनुसार हंगामा 12 बजे से पहले ही प्रारम्भ हो गया था। 12:00 बजे गोपनीय शाखा एवं 12:06 मिनट पर अनुमण्डल पदाधिकारी के दूरभाष पर हंगामे की सूचना प्राप्त हो चुकी थी जिसे टाइम स्टैम्प द्वारा भी वेरीफाई किया गया।
समिति ने की थी जांच
प्रश्नपत्र सील टूटने के बाबत पाया गया कि सभी प्रश्नपत्र का सील सुरक्षित है। केवल प्रश्न पत्र के गट्ठर को वितरण के लिए खोला गया था जिसकी वीडियोग्राफी हुई है। किसी भी प्रश्न पत्र को सेंटर में नही खोला गया है। समिति द्वारा यह भी पाया गया कि सभी अभ्यर्थियों को सभी पदाधिकारियों द्वारा बार-बार समझाने का प्रयास किया गया और परीक्षा में भाग लेने का अनुरोध किया गया। किन्तु अभ्यर्थियों के मध्य यह अफवाह थी कि यदि वे सभी लोग परीक्षा में भाग नही लेंगे तो परीक्षा रद्द हो जाएगी।