PATNA : कोई पहली बार करता है, कोई बार-बार, कोई अंतिम बार रेलवे फाटक में जल्दबाजी को लेकर इस वाक्य से विज्ञापन बहुत पहले चलता था। पटना के मसौढ़ी में बार-बार ऐसा करने वाले ‘अंतिम बार’ करते-करते बच गए। अवैध रूप से लोग जिस जगह से रेलवे ट्रैक पार करते थे, उससे यह कार कई बार लोगों ने पार करते देखी थी।
टक्कर के बाद सुनाई दी तेज धमाके की आवाज
पटना-गया रूट पर पोठही स्टेशन के पास ट्रैक पर फंसी कार से जब ट्रेन का इंजन टकराया तो एक तेज धमाका की तरह आवाज हुआ। इसके बाद काफी दूर तक कार को इंजन रगड़ते हुए चली गई। इस कारण कार की पूरी बॉडी डैमेज हो गई। पीछे के हिस्से का एक चक्का भी कार का गायब हो गया। कार की हालत देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके अंदर तीनों लोग बैठे होते तो फिर क्या होता? अगर समय रहते वो तीनों बाहर नहीं निकले होते तो उनका बचना मुश्किल था। तीनों की इस हादसे में जान चली जाती।
पैसेंजर्स के बीच अफरा-तफरी का माहौल
कार से ट्रेन के इंजन की टकराने की आवाज को सुनकर स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर पहुंच गई। ट्रेन के अंदर बैठे पैसेंजर्स में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक से ऐसा क्या हो गया। तारेगना स्टेशन से ट्रेन दोपहर 2 बजकर 32 मिनट पर चली थी और महज चंद मिनटों बाद ही घटना हो गई।
स्थानीय लोगों ने कार के अंदर कोई मौजूद था या नहीं पहले इसके बारे में जानकारी ली। जब चेक कर लिया कि कोई हताहत नहीं हुआ है तो फिर लोगों की भीड़ ने ही डाउन लाइन से कार को हटाया, उसे ट्रैक से काफी दूर किया। इस कारण करीब 25 मिनट तक ट्रेन उसी जगह पर खड़ी रह गई थी।
काउशन के कारण कम थी ट्रेन की स्पीड
घटना की जानकारी मिलने के बाद रेलवे प्रशासन एक्टिव हुआ। जांच करने RPF और GRP की टीम तारेगना स्टेशन से मौके पर पहुंची। कार में सवार तीनों लोग पास के ही किसी गांव के थे। कार पर पुलिस का स्टिकर भी लगा हुआ था। मारूती 800 कार झारखंड के बोकरो से रजिस्टर्ड है। लोगों की मानें तो तीनों लोग शराब के नशे में थे।
इस कारण वो पहले ही मौके से फरार हो गए। अब रेल पुलिस की टीम उनकी पहचान में जुटी हुई है। दूसरी तरफ दानापुर रेल डिवीजन के पीआरओ पृथ्वी राज के अनुसार जिस जगह से कार रेलवे ट्रैक पार कर रही थी, वहां पर कोई रास्ता नहीं है। गलत तरीके से वहां पर कार को ले जाया जा रहा था। बड़ी बात यह है कि डाउन लाइन में पोठही स्टेशन के होम सिग्नल पर काउशन लगा हुआ था, इस कारण ट्रेन की स्पीड पहले से ही कम थी।