जानकारों के मुताबिक नियोजित शिक्षकों को इन स्कूलों में हेड मास्टर नहीं बनाया जाता है. हाल ही में घोषित नियमावली में इसका प्रावधान किया गया था. हालांकि, उसकी प्रक्रिया अभी तक निर्धारित नहीं की जा सकी थी. फिलहाल शिक्षा विभाग इसकी प्रक्रिया तय करने को फाइनल टच देने जा रहा है. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने इस संदर्भ में निर्णय लेने के लिए सचिवालय में उच्चाधिकारियों की विशेष मीटिंग बुलायी है.
दरअसल, उन्हें अनुभव के आधार पर हेड मास्टर बनाया जाये अथवा लिखित परीक्षा लेकर अथवा इसका कोई और तरीका हो, इस संबंध में निर्णय लिया जाना रह गया है. प्रदेश के कुल 22 हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों में हेड मास्टर के पद खाली है. सरकार इन स्कूलों की प्रशासनिक बेहतरी के लिए भरने जा रही है. इनमें करीब 18 हजार से अधिक पद केवल मध्य विद्यालयों में खाली है.
फिलहाल शिक्षा विभाग नियोजित शिक्षकों की एक बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करने जा रही है. जानकारी के मुताबिक, प्रधान सचिव संजय कुमार ने गुणवत्ता पूर्ण पढ़ाई की दिशा में नियोजित शिक्षकों प्रभावी भूमिका बनाने की दिशा में और भी कई कदम उठाये हैं.