चतुर्थी चंद्र दर्शन रात्रि 8.45 बजे
चतुर्थी चंद्र दर्शन रात्रि 8.45 बजे होगा। इसके साथ ही पूजा-पाठ के बाद अर्घ्य अर्पण के साथ ही व्रत का समापन होगा। आचार्य ने बताया कि करवा चौथ का व्रत कठोर होता है और इसे अन्न और जल ग्रहण किए बिना ही सूर्योदय से रात में चंद्रमा के दर्शन तक किया जाता है। सुहागिन महिलाएं करवा चौथ के एक दिन पूर्व अपने हाथों पर मेंहदी लगवाती हैं।
नये वस्त्र धारण कर महिलाएं करती हैं पूजा
व्रत के दिन नये वस्त्र एवं आभूषण धारण करके 16 श्रृंगार करके पूजा करती हैं। इस प्रकार व्रत को 12 या 16 वर्षों तक करके उद्धापन कर सकती हैं।
व्रतधारी महिलाएं करवा का आपस में आदान-प्रदान करती हैं। व्रत -मृगशिरा नक्षत्र में मिथुन का चंद्रमा जिसका स्वामी बुध है। स्थिर लग्न वृषभ दिन बुधवार को पूजा एवं चंद्रदर्शन रात 8.45 बजे पर करने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
पर्व को लेकर बाजार में रौनक
करवा सहित अन्य पूजन सामग्री को लेकर बाजार सज गए हैं। इस साल कई रंग-बिरंगे करवा बाजार में आए हैं। जिन्हें महिलाएं खरीद रही हैं। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि व शिव योग का भी संयोग बना है।
इस योग में पूजन से विघ्नहर्ता गणेश के साथ भगवान भोलेनाथ की अपार कृपा बरसेगी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणेश की पूजा करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं।
इसीलिए इस चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी की संज्ञा दी गई है। इस शुभ योग में नया काम या कोई शुभ कृत का फलाफल जल्द मिलता है। इस दिन निवेश, आभूषण की खरीदारीए वाहन, लेन.देन करना शुभ रहेगा।
शिव-पार्वती के साथ गणेश-चंद्र की होगी पूजा
सुहागिन महिलाएं भगवान भोलेनाथ, गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय एवं चन्द्रमा की पूजा करने के बाद चंद्र को चलनी से देखती है और उन्हें अर्घ देती है।
करवा चौथ के दिन व्रती महिलाएं दिनभर व्रत रखेंगी और नए वस्त्र. श्रृंगार करके पूजन करके रात में चांद को छलनी से दीप के साथ देखेंगी। पति को देखते हुए वे चांद को अर्घ्य प्रदान करेंगी।
अर्घ्य में दूध, शहद, मिश्री और नारियल प्रदान किया जाएगा। मान्यता है कि चंद्रमा की पूजा से मन की शांति मिलती है। इसके साथ ही इस दिन भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की आराधना करने से अचल सम्पति, धन-धान्य के अलावे दाम्पत्य सुख का आशीर्वाद मिलता है।
चलनी से छन कर व्यवहार व विचार होते शुद्ध
व्रती चलनी से चंद्र दर्शन के बाद अपने पति को उसी चलनी से देखती हैं। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार चलनी से पति को देखने से पत्नी के व्यवहार और विचार दोनों छन कर शुद्ध हो जाते हैं।
सूर्योदय से पूर्व करेंगी सरगही
गुरुवार की अहले सुबह सूर्योदय से पूर्व सुहागिन महिलाएं सरगही करेंगी। सास के हाथों व्रती महिलाएं सरगही के सामान ग्रहण करेंगी। सरगही की थाली में सास अपनी बहुओं को कपड़े, नारियल,फल.मेवा आदि सौपेंगी। सरगही करने के बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लेंगी और पूरे दिन उपवास रखेंगी।
करवा चौथ पूजा मुहूर्त :
प्रदोष काल : संध्या 5.31 बजे से 7.57 बजे तक
चंद्रोदय अर्घ्य : रात्रि 7.57 बजे के बाद