सरकार पिछले कुछ वर्षों से 30 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य तय करती है। लेकिन, वास्तविक खरीद 20 लाख टन से अधिक कभी नहीं हो पा रही है। हालांकि सरकार का यह लक्ष्य सांकेतिक होता है। तीन साल पहले धान खरीद का आंकड़ा काफी गिर गया था।
यह आंकड़ा 12 लाख टन पहुंच गया था। लेकिन, उसके बाद स्थिति सुधरी है तो लगभग 18 से 20 लाख टन खरीद होने लगी। बावजूद इसके लाभ लेने वाले किसानों की संख्या दो से ढाई लाख के बीच ही होती है।
इस बार निबंधन बहुत पहले से शुरू हो गया है। लिहाजा अब तक 51 हजार किसानों ने निबंधन करा लिया है। अब खरीद गति से अंदाजा लगेगा कि कितने किसान से कितना धान इस बार सरकार खरीद सकेगी।
धान खरीद की दर में इस बार 53 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि
राज्य में धान खरीद की प्रक्रिया एक सप्ताह में शुरू हो जाएगी। इसके लिए अब तक 51 हजार किसानों ने निबंधन करा लिया है।
निबंधन की प्रक्रिया धान खरीद के अंत तक चलती रहेगी। धान खरीद की दर में इस बार 53 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। पिछले साल के 1815 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले इस बार साधारण धान की कीमत 1868 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।
राज्य में धान की सरकारी खरीद 15 नवम्बर से ही शुरू हो जाती है। यह अभियान 30 मार्च तक चलता है। लेकिन, इस वर्ष चुनाव के कारण इसमें थोड़ी देर हुई है। हालांकि, पुरजोर खरीद हर साल दिसम्बर के बाद से ही शुरू होती है। लिहाजा उस हिसाब से किसानों में इसको लेकर बहुत चिंता नहीं है।
किसानों में असली परेशानी नमी को लेकर
किसानों में असली परेशानी नमी को लेकर होगी। सरकार 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान ही खरीदती है। नमी का प्रतिशत यहां तक फरवरी के पहले नहीं आता है। अभी जहां धान की कटनी हो गई है, वहां नमी 20 प्रतिशत से कम नहीं होगी। सरकार नमी में छूट की मांग तो केन्द्र से हर साल करती है, लेकिन दो प्रतिशत छूट देने का आदेश जब तक केन्द्र से आता है तब तक धान पूरा सूख जाता है और नमी खुद ही कम हो जाती है।