जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने राजगीर के वर्तमान विधायक रवि ज्योति, पूर्व विधायक रामचंद्र सदा, ललन भुइंया और डेहरी के जिला संगठन प्रभारी राजीव रंजन कुमार उर्फ राजू गुप्ता को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। इससे पहले भी 15 लोगों को पार्टी ने निष्कासित किया था। पार्टी से अलग गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप लगाकर जदयू ने इन्हें बाहर का रास्ता दिखाया था।
राजगीर से टिकट कटने के बाद रवि ज्योति कांग्रेस में शामिल हो गए थे, जिसके बाद कल शाम को कांग्रेस ने उन्हें राजगीर से उम्मीदवार भी बना दिया। बीते दिनों जब जदयू ने अपने सभी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया था, तभी यह साफ़ हो गया कि रवि ज्योति को टिकट नहीं मिलने जा रहा है। इसके बाद ही रवि के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा जोर पकड़ने लगी थी। कांग्रेस ने अभी अपने उम्मीदवारों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन उनका टिकट तय है।
वीआरएस लेकर राजनीति में रखा था कदम
मूल रूप से दरभंगा के लहेरियासराय के रहने वाले रवि ज्योति राजनीति में आने से पहले पुलिस सेवा में थे। उनकी अंतिम पोस्टिंग नालंदा में थी। वे नालंदा के थाना प्रभारी थे। इसी वक़्त उनके चुनाव लड़ने की चर्चा होने लगी थी।
फिर उन्होंने वीआरएस लिया और जदयू के टिकट पर चुनाव जीत विधानसभा पहुंच गए। रवि की जीत इस मायने में महत्वपूर्ण थी कि उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता और इस सीट से बीते 40 सालों से जीतते आ रहे सत्यदेव नारायण आर्य को हराया था।
15 नेताओं को जदयू ने दिखाया था बाहर का रास्ता
पिछले ही दिनों जदयू ने 15 नेताओं को 6 साल के लिए निष्कासित किया था। पार्टी से बगावत कर दूसरे दल में जाने वाले नेताओं को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया था।
वशिष्ठ नारायण सिंह ने डुंमराव के विधायक ददन पहलवान, पूर्व मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, डॉ. रणविजय सिंह सिंह, पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान, सुमित कुमार सिंह, कंचन कुमारी गुप्ता, प्रमोद सिंह चंद्रवंशी, अरुण कुमार, तजम्मूल खान, अमरेश चौधरी, शिव शंकर चौधरी, सिंधु पासवान, करतार सिंह यादव, राकेश रंजन, मुंगेरी पासवान को निष्कासित किया था।