पंजाब में जब आतंकवाद चरम सीमा पर था तो कामरेड बलविंदर सिंह ने आतंकियों का बहुत बहादुरी से मुकाबला किया था। उन पर करीब 20 बार बड़े हमले हुए और हर बार बलविंदर सिंह ने आतंकियों को लोहे के चने चबाए।
हैंड ग्रनेडों और राकेट लांचरों के साथ हमला करने वाले कई नामी आतंकियों को उन्होंने मार गिराया था।1993 में बलविंदर सिंह भिखीविंड, उनके भाई और दोनों की पत्नियों को राष्ट्रपति की और से शौर्य चक्र से नवाजा गया था।
कामरेड बलविंदर सिंह यहां सुबह करीब सात बजे घर में थे। इसी दौरान कुछ अज्ञात लोग घर में आए और इन लोगों ने अचानक पिस्टलों के साथ कामरेड बलविंदर सिंह पर गोलियों चलानी शुरू कर दी। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस अभी यह नहीं बता रही है कि यह हमला आतंकी था या किसी अन्य का इसमें हाथ था। उनकी सुरक्षा कुछ समय पहले वापस ले ली गई थ। इसका कामरेड बलविंदर सिंह ने विरोध किया था।
कामरेड बलविंदर सिंह के भाई रंजीत सिंह ने संदेह जताया है कि यह हमला आतंकी हो सकता है। बताया जाता है कि कामरेड बलविंदर सिंह अपने आवास के पास ही एक स्कूल भी चलाते थे। करीब एक साल पहले भी उन पर अज्ञात लोगों ने हमला भी किया था।
घटना की जानकारी मिलने के बावजूद पुलिस आधा घंटा देर से पहुंची हालांकि घटना स्थान के पास ही पुलिस थाना भिखीविंड है। बाद में मौके पर डीएसपी राजबीर सिंह भी पहुंचे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।