2010 के चुनाव में बहुमत प्राप्त करने के बाद सहयोगी दल के साथ विश्वासघात किया और 2015 में हमारे दम पर जीतने के बाद पीठ में छुरा घोंपा। नीतीश की कोई नीति, नियम और नियत नहीं। अब तो ये नेता भी नहीं रहे।
बता दें कि सीएम नीतीश कुमार अपने हर जनसभा में लालू-राबड़ी राज पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहल
कुछ काम होता था क्या? पहले आपदा में क्या होता था? आज जो लोग बोल रहे हैं, उनके राज में कुछ होता था क्या? लिस्ट बनते ही रह जाता था, लेकिन पीड़ित परिवार को कुछ नहीं मिलता था।कुर्सी के लालच में नीतीश कुमार ने बिहार को गर्त में पहुँचा दिया है। 2010 के चुनाव में बहुमत प्राप्त करने के बाद सहयोगी दल के साथ विश्वासघात किया और 2015 में हमारे दम पर जीतने के बाद पीठ में छुरा घोंपा।
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) October 16, 2020
नीतीश की कोई नीति, नियम और नियत नहीं। अब तो ये नेता भी नहीं रहा। pic.twitter.com/18NBtSxJo3
उन्होंने कहा कि हमारी जब सरकार आई तो हमने कह दिया कि सरकारी खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का है। बिहार में कोरोना संकट हो या फिर बाढ़ की स्थित हो,हर समय हमारी सरकार ने आपदा पीड़ितों की सेवा की है।