वकील साहब ने दलील दी कि लकड़ी के पिता ने अपरण का झूठा केस किया है, यह मामला राजी-खुशी से शादी का है l
वकील साहब ने कोर्ट को यह भी बताया कि लड़की ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के अंतर्गत अदालत में गवाही भी दी है, जिसमें उसने आरोपित लड़के से प्यार व शादी करने की बात बताई है।
अपहरण के इस मुकदमें में आरोपित की जमानत मांग रहे वकील साहब तब पेशोपेश में पड़ गए, जब हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पूछा, "वकील साहब पहले यह बताएं कि प्यार क्या होता है? क्या आप प्यार की परिभाषा जानते हैं?''
कोर्ट के इस सवाल पर वकील साहब चकरा गए l कुछ क्षणों तक उन्होंने चुप्पी साध ली l जज साहब ने फिर अपना सवाल दोहराया l इसपर वकील साहब ने कहा, "हुजूर मैंने कभी भी किसी लड़की से प्यार नहीं किया है, इसलिए प्यार की परिभाषा नहीं पता है l''
अब मुकदमे में कोर्ट के प्यार को लेकर सवाल और वकील साहब के उत्तर की खूब चर्चा हो रही है। वैसे, बताते चलें कि कोर्ट ने प्यार की परिभाषा सुने बिना ही आरोपित को जमानत दे दी l