सबसे मजेदार बात यह है दोनों प्रत्याशियों ने एक ही सिंबल पर एक ही विधानसभा के लिए नामांकन किया है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर यदि देखें तो दोनों प्रत्याशियों की पार्टी एक ही है और दोनों प्रत्याशियों के एफिडेविट को स्वीकार भी कर लिया गया है। यानी दोनों के फार्म को एक्सेप्ट कर लिया गया है। यदि चुनाव में दोनों प्रत्याशी एक ही सिंबल पर उतरेंगे तो भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी।

उससे भी आश्चर्य करने वाली बात यह है कि एक ही जगह से पार्टी दो लोगों को कैसे उतार सकती है। जाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव लगातार जन अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं और ऐसे में उनसे यह गलत ही हुआ है। हालांकि अभी स्क्रूटनी का वक्त है। चुनाव आयोग स्क्रूटनी में दोनों में से एक उम्मीदवार को ही चुनेगा और एक उम्मीदवार के नामांकन को रद्द कर दिया जाएगा। इस तरह की गलती ना हो इसके लिए चुनाव आयोग ने सिंबल देने का प्रावधान बनाया है। ताकि एक विधानसभा सीट से एक ही को पार्टी अपना उम्मीदवार बनाए।