2020/09/24

बच्चों को लगाया जा रहा है जेई का टीका, कहीं आपका बच्चा तो नहीं छूट रहा -सिविल सर्जन

BIHAR-SAHARSA-जिले के 7 लाख 70 हजार 329 बच्चों को जापानी इंसेफ्लाइटिस यानि जेई से बचाव को टीका लगाया जाना है। इसी क्रम में सिविल सर्जन कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में सिविल सर्जन डॉ. अवधेश कुमार ने बताया जेई एक गंभीर बीमारी है। इसकी रोकथाम में जेई टीका महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसलिए जिले के सभी 10 प्रखंडों में जेई टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है।

 जिसमें 01 वर्ष से लेकर 15 वर्ष के सभी छूटे हुये बच्चों को खोजकर जेई का टीका लगाया जा रहा है। अभी तक कुल 377199 बच्चों को टीका लगा प्रतिरक्षित किया गया है। 

साथ ही सिविल सर्जन डॉ. अवधेश कुमार ने बताया, जिले के सभी पीएचसी के प्रभारी को पत्र के माध्यम से दिशा निर्देश दिया गया है कि जेई तथा टीकाकरण की सफलता के लिए शत-प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण कराना सुनिश्चित करें, साथ ही सभी आशा अपने क्षेत्र में लोगों को इसके प्रति जागरूक करें।

 जेई टीकाकरण अभियान में पाथ, यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ, इत्यादि संस्थायें सहयोग कर रही है सिविल सर्जन डाक्टर अवधेश कुमार ने बताया यह बीमारी 15 साल तक के बच्चों को बहुत अधिक प्रभावित करता है. बच्चों में बुखार आने के किसी भी मामले को नजरअंदाज नहीं करने के लिए उन्होंने अपील की है और कहा है कि बच्चों को जेई का टीकाकरण कराया जाना जरूरी है। “चमकी बुखार से बचाना है जेई का टीका लगाना है” का नारा भी दिया। 


मच्छर के काटने से होता है जापानी बुखार: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डाक्टर कुमार विवेकानंद ने बताया जापानी बुखार मच्छर के काटने से होता है. बुखार होने के साथ बच्चे को उल्टी होती है. उसके सिर में दर्द होता है. उसके सोचने समझने व सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है. इस बीमारी का प्रकोप अगस्त से लेकर अक्टूबर माह के अंत तक रहता है. एक से 15 साल तक के बच्चों को यह अपनी चपेट में ले लेता है. वहीं कुपोषित बच्चों में चमकी या एईएस की संभावना बहुत अधिक प्रबल होती है. बच्चों के खून में सुगर और सोडियम की कमी हो जाने पर उसकी मौत भी हो जाती है. पीने के लिए उबाला हुआ पानी का इस्तेमाल करना लाभदायक होता है. इसके अलावा मच्छरों को पनपने नहीं देने के सभी उपायों का भी पालन करना चाहिए.

बरतें सावधानी: - जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी 
तेज बुखार आने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से साफ़ करें 
• किसी भी तरह की दवा मरीज को देने से पहले चिकित्सक की सलाह लें
• बेहोशी या मिर्गी की स्थिति में मरीज को छायादार एवं खुली जगह लिटायें 
• बच्चे के शरीर से कपडे हटा दें एवं गर्दन को सीधा रखें 
• अगर मुंह से लार या झाग निकल रहा हो तो साफ़ कपडे से साफ़ करें 
• बच्चे को रात में खाली पेट सोने न दें 
• एईएस या जेई के लक्षण दिखने पर मरीज को लेकर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जायें

बैठक में यूनिसेफ एसएमसी बनटेश नारायण महेता, मजहरुल हसन, यूएनडीपी के मोहम्मद खालिद, डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि सूरज कुमार, पाथ के डिविजनल कोऑर्डिनेटर अरविंद सिंह, पाथ के जिला समन्वयक मोहम्मद नौशाद अली, जिला प्रतिरक्षण कार्यालय के कर्मी दिनेश कुमार दिनकर , प्रमोद कुमार तथा अन्य, स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।