जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो क्या हो, कुछ ऐसा ही हाल है पुलिस विभाग का। यहां पर महिला पुलिसकर्मी अगर अधिकारियों की डिमांड पूरी कर दे तो उन्हें ड्यूटी करने दिया जाता है। ऐसा नही करने पर उसे तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती।
पीड़ित महिला पुलिसकर्मी ने पुलिस विभाग का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि विभाग में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। यहां जमकर कास्टिंग काउच चलता है। इज्जत बचाकर नौकरी करना यहां संभव नहीं है।
महिला पुलिसकर्मी ने एक पुलिसकर्मी रागीव आलम खां को 60 हजार रूपये कर्ज दिया था। पैसा वापस करने में आनाकानी करने पर उसने आइजी के रीडर शुभ करण ओझा से मदद मांगी। इस आड़ में ओझा महिला कर्मी से अश्लील हरकत पर उतर आए।
जब कर्मी इसका विरोध करने लगी तो रागीव के साथ मिलकर इसे ब्लैकमेल करने लगे। महिला कर्मी ने दो लिखित शिकायत आइजी को सौंपी है, जिसमें रागीव आलम खां के खिलाफ फोन पर धमकाने और अभद्र भाषा के प्रयोग का आरोप लगाया है।
वहीं आइजी रीडर के खिलाफ उन्होंने अश्लील बातें करने गलत नीयत से प्राइवेट पार्ट छूने का गंभीर आरोप लगाया है।
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